भारत ने मालदीव को सौंपे डॉर्नियर विमान, हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ होगी नाकाम

भारत (India) ने पड़ोसी देश मालदीव (Maldives) को डॉर्नियर विमान सौंपे हैं. माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों की सुरक्षा में बढ़ोत्तरी होगी.

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भारत (India) ने मंगलवार को डॉर्नियर विमानों (Dornier Aircrafts) की पहली खेप पड़ोसी देश मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (Maldives National Defence Force) को सौंप दी. MDNF के पायलट इन विमानों को भारत की मदद से उड़ाएंगे. इन विमानों से भारत को हिंद महासागर में चीनी सेना की गतिविधियों पर नजर रखने में सहयोग मिलेगा.

भारत और मालदीव के बीच इन डॉर्नियर विमानों को लेकर साल 2016 में गवर्मेंट-टू-गवर्मेंट डील हुई थी. सूत्रों का कहना है कि इन विमानों को MDNF के कमांड और कंट्रोल में ऑपरेट किया जाएगा और इनकी उड़ान का खर्च भारत सरकार उठाएगी. मालदीव स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि इन विमानों से मानवीय राहत कार्यों के अलावा भारत-मालदीव के स्पेशल इकोनॉमिक जोन की भी निगरानी की जाएगी.

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भारतीय नौसेना MDNF के सात कर्मियों को डॉर्नियर के संचालन की ट्रेनिंग दे रही है, इनमें पायलट, एयर ऑब्जर्वर और इंजीनियरों शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक भारत और मालदीव एक साथ हिंद महासागर में घुसपैठ की कोशिश करने वाले चीनी सेना के जहाजों और पनडुब्बियों पर नजर रखेंगे. इससे गैरकानूनी रूप से मछली पकड़ने और ड्रग्स की तस्करी पर भी निगरानी रखी जाएगी.

रणनीतिक रूप से मालदीव महत्वपूर्ण

सूत्रों का कहना है कि इन विमानों से एंटी पायरेसी मिशन और आतंकवाद निरोध अभियानों को भी अंजाम दिया जाएगा. मालदीव कई छोटे-छोटे द्वीपों से मिलकर बना है, ऐसे में डॉर्नियर विमानों से उसके सभी क्षेत्रों पर निगरानी रखने में भी मदद मिलेगी. मालदीव स्थित भारतीय दूतावास ने ट्वीट कर विमानों की डिलिवरी की पुष्टि की.

बता दें कि मालदीव भारत के लिए रणनीतिक रूप से एक अहम देश है. मालदीव अरब सागर में 90 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है. इसकी जलसीमा से सबसे नजदीक स्थित भारतीय द्वीप मिनीकॉय की दूरी सिर्फ 100 किलोमीटर है, जो लक्ष्यद्वीप की राजधारी कावरत्ती से लगभग 400 किलोमीटर दूर है. केरल के दक्षिण बिंदू से मालदीव के इस द्वीप की दूरी सिर्फ 600 किलोमीटर है.

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