VIDEO:देखें मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ने कैसे किया टारगेट को ध्‍वस्‍त

मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की सबसे खास बात यह है कि इसका वजन बेहद कम है. यह दिन हो या रात किसी भी वक्‍त हमला करने में सक्षम है.

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में फायरिंग रेंज से मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम (MPATGM) का सफल परीक्षण किया. इस मिसाइल सिस्‍टम को DRDO ने ही विकसित किया है. यह इस मिसाइल प्रणाली का तीसरा सफल परीक्षण है.

मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की सबसे खास बात यह है कि इसका वजन बेहद कम है. इस मिसाइल को मैन पोर्टेबल ट्राइपॉड लॉन्चर से लॉन्च किया गया और इसने लक्ष्य को एकदम सही निशाने पर जाकर भेद दिया.

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए DRDO को बधाई दी है. MPATGM का परीक्षण उस समय सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ा हुआ है.

DRDO की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह मिसाइल अचूक निशाना साधती है और दुश्मन के टैंक का पीछा करते हुए उसे तबाह कर देती है. यह मिसाइल वजन में इतनी हल्की है कि इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है.

MPATGM को किसी भी ऊंची पहाड़ी पर या दूसरी किसी जगह पर आसानी से ले जाया जा सकता है. इसकी खासियत है कि यह दिन और रात दोनों समय किसी भी वक्‍त हमला करने में सक्षम है. उम्मीद की जा रही है कि 2021 तक इस मिसाइल का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा. आमने-सामने की लड़ाई में MPATGM बेहद कारगर और निर्णायक साबित हो सकती है.

इससे पहले भारतीय सेना ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में तीसरी पीढ़ी के एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल नाग का सफल परीक्षण किया था. नाग मिसाइल को भी DRDO ने विकसित किया है.

तीसरी पीढ़ी की गाइडेड एंटी टैंक मिसाइल नाग को बनाने का कार्य 2019 के अंत में शुरू हो जाएगा. अब तक इस मिसाइल का ट्रायल चल रहा था.