भारत में भी होगा अमेरिका की तरह चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, पीएम मोदी ने की घोषणा

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का मुख्य सैन्य सलाहकार होता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (गुरुवार को) स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से कहा कि तीन रक्षा सेवाओं का नेतृत्व करने के लिए सरकार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद का सृजन करेगी.

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में सैन्य व्यवस्था, सैन्य शक्ति और सैन्य संसाधन में सुधार पर लंबे अरसे से चर्चा चल रही है. कई कमीशनों के रिपोर्ट आए. सभी रिपोर्टों में कहा गया कि हमारी तीनों सेनाओं जल, थल, नभ के बीच समन्वय तो है, लेकिन आज जैसे दुनिया बदल रही है ऐसे में भारत को टुकड़ों में सोचने से नहीं चलेगा.

उन्होंने कहा, “सरकार जल्द ही तीन रक्षा सेवाओं का नेतृत्व करने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का निर्माण करेगी.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी पूरी सैन्य शक्ति को एक मुस्त होकर एक साथ आग बढ़ने में काम करना होगा. अब हम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस की व्यवस्था करेंगे. इस पद के गठन के बाद तीनों सेनाओं के शीर्ष स्तर एक प्रभावी नेतृत्व मिलेगा.

क्या होता है चीफ ऑफ स्टाफ?

अभी चीफ ऑफ स्टाफ (सीओएससी) होता है. चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी में सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुख रहते हैं. सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसका चेयरमैन नियुक्त किया जाता है. यह पद वरिष्ठतम सदस्य को रोटेशन के आधार पर रिटायरमेंट तक दिया जाता है.

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में गठित की गई अरुण सिंह कमेटी में पहली बार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का प्रस्ताव दिया था. लेकिन इसके बाद इस प्रस्ताव को आने वाली ज्यादातर सरकारों ने ठंडे बस्ते में डाला. करगिल युद्ध के बाद इस पद के लिए एक बार फिर से मांग उठी लेकिन यह लागू नहीं हो सका.

करगिल रिपोर्ट में सीडीएस बनाये जाने का दिया था सुझाव

करगिल रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों को बारी-बारी से सीडीएस बनाया जाए. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का चेयरमैन चार स्‍टार वाला जनरल होगा, जिसका कार्यकाल 2 साल रखा जाए, जिसे बढ़ाया जा सकता है.

आदर्श रूप में सीडीएस को तीनों सेनाओं का प्रमुख होना चाहिए न कि अपने मातहत बिना किसी कमांड के समकक्षों में प्रथम. सीडीएस अलग-अलग क्षेत्र के कमांडरों को निर्देश देगा जो तीनों सेनाओं के सैनिकों और साजो सामान से लैस होंगे.

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की लंबी भू-सीमा और पहाड़ी क्षेत्रों को देखते हुए दो बड़े समुद्री कमांड और तीनों सेनाओं के एक ‘थियेटर’ कमांड सिस्‍टम की जरूरत होगी. ‘थियेटर’ कमांड में तीनों सेनाओं के सैनिक शामिल होंगे. इससे भारत बाहरी और आतंरिक दोनों ही खतरों से निपट सकेगा.

अटल बिहारी वाजपेयी का काम किया पूरा

वाजपेयी सरकार से लेकर अब तक यह सिफारिश राजनीतिक सहमति नहीं होने की वजह से लागू नहीं हो पाई थी.

दरअसल, कर‍गिल युद्ध के बाद से ही तीनों सेनाओं में रणनीतिक योजना बनाने, बजट, हथियारों की आपूर्ति और प्रशिक्षण में एकरूपता की कमी महसूस की जा रही थी.

अब सीडीएस के गठन के बाद सरकार को अब सामान्‍य हालात और संकट की स्थिति में सेना, नौसेना और एयरफोर्स से एक सलाह मिलेगी. बता दें कि भूतकाल में तीनों सेनाओं में समन्‍वय की कमी वजह से भारत को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था.

ऐसे में डिफेंस के लोग पीएम मोदी के इस घोषणा से बेहद ख़ुश हैं.

चीन में एक सीडीएस है जो भारत से जुड़े मुद्दों को देखता है. अमेरिका में पहले से ही सीडीएस की नियुक्ति की गई है. कनाडा, फ्रांस, घाना, इटली, नाइजीरिया, सिएरा लिओन, स्पेन, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद है.