एयर स्ट्राइक के ये हैं सात महाअस्त्र!

आतंकिस्तान को जड़ से उखाड़ने के मोड में आ चुकी भारतीय सेना के पास ऐसे-ऐसे हथियार हैं, जो पाकिस्तान की बर्बादी की वजह बन सकते हैं.

नयी दिल्ली: एयर स्ट्राइक एक चक्रव्यूह की तरह था. इस चक्रव्यूह में सात ऐसे अस्त्रों का इस्तेमाल हुआ, जिनका जवाब पाकिस्तान के पास नहीं था. यही वजह है कि आतंकी ठिकानों को उड़ाने में भारत को कुछ खास मुश्किल नहीं हुई. आइये जानते हैं ऐसे ही सात अस्त्रों के बारे में, जिनकी बदौलत पाकिस्तान में जमींदोज़ हो गए आतंकी.

1. मिराज 2000
ये लड़ाकू विमान एयर टू सर्फेस मिसाइल भी कैरी कर सकता है. मिराज से इस्तेमाल होने वाली ये वो मिसाइल है, जो हवा से जमीन पर मार कर सकती है. मिराज में 9 हार्ड पॉइंट होते हैं. ये 9 पॉइंट्स हथियार ले जाने में सक्षम हैं. मिराज की सबसे बड़ी बात ये है कि इसे रडार भी आसानी से नहीं पकड़ सकता. एक ही समय में ये एयरक्राफ्ट 4 मिका मिसाइल, 2 मैजिक मिसाइल, 3 ड्रॉप टैंक्स के साथ लैस हो सकता है. मिराज-2000 लेजर गाइडेड बम भी गिरा सकता है.

2. सुदर्शन लेजर गाइडेड बम
GBU-12 PAVEWAY लेजर गाइडेड बम अमेरिका की ख़ास तकनीक से बना है. ये बम 450 किलो वजनी होता है. इस लेसर बम की मारक क्षमता अचूक है. इसे SU-30MKI, मिराज-2000 और मिग-29 से बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है. सर्जिकल स्ट्राइक-2 में इस लेजर बम का ही इस्तेमाल किया गया है.

3. मैट्रा मैजिक क्लोज कॉम्बेट मिसाइल
फ्रांस निर्मित मैट्रा सुपर 530 सीरीज का उन्नत रूप है मैट्रा मैजिक क्लोज कॉम्बेट मिसाइल सुपर 530D. इस मिसाइल को मिराज-2000 से दागना बहुत आसान है. ये मिसाइल 270 किलो वजनी है. इस मिसाइल के अचूक वार दुश्मन पर कहर बन कर टूटते हैं.

4. लाइटनिंग पॉड
लेसर डेसिग्रेटर से लक्षित लाइटनिंग पॉड की क्षमता भी इस सर्जिकल स्ट्राइक में देखने को मिली थी. लाइटनिंग पॉड के जरिए बम का मार्ग अचीव करना काफी कारगर है. इस तकनीक से सर्जिकल स्ट्राइक का लक्ष्य काफी आसान हो गया.

5. नेत्र एयरबॉर्न वॉर्निंग जेट्स
इजरायली अवॉक्‍स (नेत्र) का इस्तेमाल भी सर्जिकल स्ट्राइक-टू में हुआ है. बताया जाता है कि हमले से पहले इजरायली अवॉक्स (नेत्र) ने पाकिस्‍तान के रडार को जाम कर दिया. इसके बाद हारोन ड्रोन ने पीओके में छुपे आतंकी ठिकानों की जानकारी दी थी. नेत्र एयरबॉर्न वॉर्निंग जेट्स के इस्तेमाल से किसी भी टारगेट को अचीव करना बेहद आसान है.

6. आईएल 78 एम
डीआरडीओ के बनाये गए आईएल 78 एम भी इस ऑपरेशन में शामिल थे, जो करीब 200 किलोमीटर दूर तक हर हरकत पर नज़र रख सकते हैं. साथ ही हवा में ईंधन भरने वाला एयर टू एयर रीफ्यूल करने में सक्षम है.

7. हेरॉन ड्रोन
इंडियन एयरफोर्स और आर्मी ने हेरोन ड्रोन से नियंत्रण रेखा पर हवाई निगरानी की थी. Medium altitude long endurance unmanned aerial vehicle (UAV) का निर्माण इजरायल ने ख़ास तौर पर किया है. इस सिस्टम से भारत को LoC पर दुश्मन की टोह लेने में काफी मदद मिली. यही वजह है कि सर्जिकल स्ट्राइक-2 सफल रही.

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