‘WhatsApp ग्रुप्‍स से बना लें दूरी’, सेना ने कर्मचारियों को क्‍यों दी ऐसी हिदायत, पढ़ें

सेना में पहले से ही एक सोशल मीडिया पॉलिसी है. किसी को भी अपनी पोस्टिंग या सेना के ऑपरेशंस के बारे में कोई भी जानकारी देने पर रोक है.

नई दिल्‍ली: सेना ने अपने कर्मचारियों को WhatsApp के इस्‍तेमाल को लेकर सचेत किया है. उन WhatsApp ग्रुप्‍स को ज्‍वाइन न करने की हिदायत दी गई है जिनके सदस्‍यों की पहचान न कर सकें. यह एडवायजरी इस वजह से जारी की गई है कि ताकि सैन्‍य कर्मचारियों को खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए निशाना न बनाया जा सके.

अधिकारियों से कहा गया है कि वह बड़े WhatsApp ग्रुप्‍स का हिस्‍सा न बनें. अगर जरूरत हो तो अधिकारियों का एक छोटा ग्रुप बनाया जा सकता है. ANI ने सैन्‍य सूत्रों के हवाले से बताया है कि दुश्‍मन के खुफिया लड़ाके कुछ WhatsApp ग्रुप्‍स का हिस्‍सा बने और अधिकारियों की बातचीत पर नजर रखते रहे.

आर्मी ने यह भी कहा है कि ऐसे मेसेजिंग प्‍लैटफॉर्म्‍स के जरिए मालवेयर फैलाकर कर्मचारियों को निशाना बनाया जा सकता है. सेना में पहले से ही एक सोशल मीडिया पॉलिसी है. इसके तहत किसी को भी अपनी पोस्टिंग या सेना के ऑपरेशंस के बारे में कोई भी जानकारी देने पर रोक है.

WhatsApp ग्रुप्‍स, Facebook के जरिए ‘हनीट्रैप’

पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई रिपोर्ट्स आई हैं जिनसे दुश्‍मन की खुफिया एजेंसियों के इरादे का पता चलता है. कुछ सैन्‍य कर्मचारी हनीट्रैप में भी फंसे हैं जिनकी जांच जारी है. सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में एक वरिष्‍ठ अधिकारी को संदिग्‍ध दुश्‍मन ऑपरेटिव ने ईमेल भेजा था कि अगर उसने मेल में दिए लिंक पर क्लिक नहीं किया तो उसकी बेटी के वीडियोज पब्लिक कर दिए जाएंगे. यह संदेश दरअसल उस लिंक पर क्लिक करा खतरनाक मालवेयर डाउनलोड कराने के लिए भेजा गया था.

सेना ने अपने कर्मचारियों के परिवार से भी दरख्‍वास्‍त की है कि वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से अधिकारी से जुड़ी सभी जानकारी हटा दें. इसके अलावा यूनिफॉर्म में फोटो भी अपलोड न करें.

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