जब वैज्ञानिकों को ‘येति’ की उंगली मिली और रिसर्च के बाद टूट गया उनका भ्रम

मंगलवार की रात भारतीय सेना ने ट्वीट किया कि पर्वतारोहियों को रहस्यमयी येति के पैरों के निशान मिले हैं. इसके साथ ही दुनिया की दिलचस्पी येति में फिर जाग गई है. यहां पढ़िए कि किसने, कब, कहां किया येति देखने का दावा.

मंगलवार 29 अप्रैल 2019 की रात ट्विटर के रास्ते तूफान आया. भारतीय सेना के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से कुछ तस्वीरें ट्वीट की गईं. कैप्शन लिखा था-

9 अप्रैल 2019 को पहली बार भारतीय सेना के पर्वतारोही अभियान में येति के 32*15 इंच के पैरों के निशान मिले हैं. मकालू बेस कैंप के पास. ये रहस्यमयी हिम मानिव इससे पहले भी सिर्फ मकालू बारून नेशनल पार्क में देखा गया है.

ट्वीट आते ही बहुत सारे लोग शाबाशी और शुभकामनाएं देने लगे, वहीं कुछ लोग ट्रोल करने लगे. येति का अस्तित्व है या नहीं, ये सदियों पुराना सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया. ये इतना विवादित मसला है जिस पर वैज्ञानिक कभी एकमत नहीं हो पाए. जिन्होंने देखने का दावा किया वो वैज्ञानिक नहीं थे और न उनके पास सबूत थे. सबूत हों भी तो उन पर बिना जांच के विश्वास करने का कोई सवाल ही नहीं था.

दुनिया की नजर में येति

पुराने जमाने के किस्से और कहानियों से, किंवदंतियों से प्रेरित होकर फिल्मों तक इसका स्वरूप फिल्मों तक पहुंचा. पॉपुलर कल्चर में इसका साइज इंसान से बड़ा, शरीर पर बालों का ढेर और अजीब सी गंध लिए हुए बताते हैं. दो पैरों पर चलता है. हिमालय की रेंज में आने वाले बर्फीले पहाड़ों, खासतौर से एवरेस्ट को इसका घर बताया जाता है. लद्दाख के बौद्ध मठों में रहने वालों ने भी येति या हिम मानव को देखने का दावा किया है लेकिन किसी के पास सबूत नहीं है.

Yeti, जब वैज्ञानिकों को ‘येति’ की उंगली मिली और रिसर्च के बाद टूट गया उनका भ्रम

कब बात शुरू हुई?

येति के अस्तित्व की तरह इस पर पहली बार बात किसने की, ये भी विवाद का विषय है. लोग यहां तक कहते हैं कि सिकंदर आया थो तो उसे भी येति देखने में इंटरेस्ट था. उसे समझदार लोगों ने बताया कि वो हमारी पहुंच से दूर, बहुत ऊपर रहते हैं, हम नहीं देख सकते. फिर उसने ये जिद छोड़ दी थी. 1832 में जर्नल ऑफ एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल में बीएच हॉजसन का यात्रा वृत्तांत छपा था. जिसमें हॉजसन के गाइड्स ने बताया था कि उन्होंने किसी भारी भरकम इंसान को देखा जो लंबे बालों से ढका था. खुद हॉजसन ने बताया कि वो वनमानुष रहा होगा.

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1921 में पत्रकार हेनरी न्यूमैन ने कुछ ब्रिटिश रिसर्चर्स का इंटर्व्यू छापा. इन लोगों ने दावा किया था कि इन्हें बहुत बड़े पैरों के निशान दिखे हैं. ये भी बताया कि ये निशान मतोह कांगमी के थे. मतोह कांगमी का मतलब ‘भालू मानव.’ भालू जैसा इंसान. 1925 में एक ग्रीक फोटोग्राफर एनए टोंबाज़ी ने भी कहा था कि उन्होंने बर्फ के बीच खड़ा होकर चलती इंसान जैसी आकृति देखी थी. डार्क कलर का था और कपड़े नहीं पहन रखे थे. ये सब बातें सिर्फ बातें थीं, सबूत कोई नहीं था.

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नाम मिला ‘येति’ चलता रहा सिलसिला

1951 तक येति देखने का दावा बहुत लोगों ने किया था, सबूत के तौर पर कुछ नहीं दिखाया था. 1951 में एरिक शिंप्टन ने एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान दूसरे रास्ते की तलाश की. उसी रास्ते पर उन्हें पैरों के बड़े निशान दिखे. उन निशानों की तस्वीर खींच ली. कुछ लोगों ने ये भी कहा कि बर्फ पिघलने से ये डिजाइन बनी है लेकिन तभी पहली बार इस कभी न मिले जीव का नामकरण हुआ. कहा गया येति. ये नेपाल में बहुत ज्यादा प्रचलित है.

1953 में एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नारगे ने माउंट एवरेस्ट पर बड़े पैरों के निशान देखने की बात बताई. लेकिन एडमंड ने येति देखने का दावा नहीं किया. कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. 1986 में पर्वतारोही रीनहोल्ड मेसनर येति देखने का दावा किया. 2011 में एडिनबर्ग ज़ू में रिसर्चर्स को एक उंगली मिली जिसे येति का बताया गया था. रिसर्च के बाद पता चला कि ये इंसान की उंगली थी. तो ये दावा भी हवा हो गया. 2011 में रूसी एक्सपर्ट जॉन बाइंडरनैगल ने भी साइबेरिया में बड़े पैरों का निशान मिलने का दावा किया लेकिन कुछ साबित नहीं हुआ.

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भालू के नाम से भटके वैज्ञानिक

2012 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और लोसान म्यूजियम ऑफ जूलॉजी ने उन सब नमूनों को मंगाया जो येति से संबंधित लगते हों. येति के अस्तित्व और उसका इंसान से कनेक्शन तलाशने वाली टीम की अगुवाई ब्रायन साइक्स कर रहे थे. उनके पास भारत, नेपाल, भूटान, इंडोनेशिया, रूस और अमेरिका से DNA सैंपल आए. उनकी जांच की गई तो पता चला कि वो ऐसे जानवरों के थे जिनके बारे में हमें पहले से पता है. साइक्स को बालों का एक गुच्छा भी मिला जो हिमालय से आया था. रिसर्च के बाद साइक्स ने बताया कि ये पोलर बियर के हैं.

रिसर्च अब भी जारी है लेकिन कुछ पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं. ऐसे में भारतीय सेना के ट्वीट के बाद येति में दुनिया की दिलचस्पी एक बार फिर दिख रही है.