पहाड़ पर 14 महीने की है इंडियन आर्मी की तैयारी, चीन को सर्दी में कराएगी गर्मी का एहसास

महायोद्धा बोफोर्स (Bofors) ने 21 साल पहले करगिल की चोटियों पर दुश्मन के छक्के छुड़ाए हैं. इसके एक धमाके से कंक्रीट के बंकर तक उड़ गए, वहीं गोले ने नापाक दगाबाज को चोटियों से खदेड़ दिया.

इस वक्त भारतीय सेना (Indian Army) चीन को हर मोर्चे पर पस्त कर रही है और उसकी नीयत और चालबाजी को समझते हुए पूरी तैयारी भी कर रही है. चाहे बात साजो-सामान की हो या दमदार हथियार की. LAC पर किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होने दी जा रही है. यकीन मानिए LAC पर ऐसी तैयारी आपने पहले कभी नहीं देखी होगी. चीन को जवाब देने के लिए फॉरवर्ड पोस्ट पर बोफोर्स तोप (Bofors gun) और एयर डिफेंस गन तक तैनात किए गए है.

LAC पर अब आर-पार की तैयारी है. चीनी फौज की तरह लाइट-कैमरा-एक्शन नहीं, बल्कि इंडियन आर्मी रियल एक्शन का आगाज करेगी. लद्दाख में फॉरवर्ड पोस्ट पर भारतीय सेना चीन को सर्दी में गर्मी का एहसास कराने की तैयारी कर रही है. इस काम के लिए मोर्चे पर करगिल का महायोद्धा बोफोर्स पहुंच गया है.

LOC पर बोफोर्स ने चटाई थी धूल

महायोद्धा बोफोर्स ने 21 साल पहले करगिल की चोटियों पर दुश्मन के छक्के छुड़ाए हैं. इसके एक धमाके से कंक्रीट के बंकर तक उड़ गए, वहीं गोले ने नापाक दगाबाज को चोटियों से खदेड़ दिया. ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों को मार गिराने में इस तोप की फायर पावर ने भारतीय सेना की बहुत मदद की. इस तोप ने कारगिल युद्ध के दौरान अपने दम पर ही पूरे युद्ध का रुख बदल दिया.

पाकिस्तान के बाद अब एक और धोखेबाज को बारूदी जवाब देने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर बोफोर्स सीना ताने खड़ा हो गया है. LAC पर बोफोर्स तोप का मुंह चीन की ओर मुड़ गया है. करीब 60 बोफोर्स होवित्जर तोप लद्दाख में फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात किए गए हैं.

क्यों तैनात की गई बोफोर्स

LAC पर बोफोर्स की तैनाती के कई मायने हैं. भारत नहीं चाहता की चीन की कोई भी चालबाजी सफल हो और ड्रैगन धोखा देने के किसी भी मौके में सफल हो. चीन अगर ऐसी हिमाकत करे भी तो जवाब बोफोर्स का गोला दे. LAC पर ऐसे-ऐसे हथियार और गन पहुंच चुके हैं जिसका तोड़ चीन के पास नहीं है. इसी में एक है एयर डिफेंस गन. इसके घातक अटैक से 5 हजार फीट की ऊंचाई तक मिसाइल और एयरक्राफ्ट तबाह हो जाएंगे. अगर दुश्मन इसकी फायरिंग रेंज में आया तो उसकी खैर नहीं.

1962 की गलती नहीं दोहराना चाहता भारत

भारत इस बार की सर्दी में LAC पर 1962 की गलती दोहराना नहीं चाहता. क्योंकि चीन का चाल-चरित्र और चेहरा सब कुछ आज भी वैसा ही है. उसकी हड़प-नीति भी वैसी ही है. लेकिन हिंदुस्तान अब पहले जैसा नहीं है. इसलिए हिंदुस्तान LAC पर हथियार और सैनिक बढ़ा रहा है. मैसेज क्लीयर है कि अब ड्रैगन ने कोई भी हिमाकत की, जरा सी भी जुर्रत की, तो आर-पार होना तय है. पिछले कुछ दिनों में चीन ने भारत की वो ताकत देखी, जिसकी कल्पना बीजिंग ने कभी नहीं की थी और अब LAC पर वो भारत की तैयारी और तैनाती को आंखें चीरकर देख रहा है.

चीन की बातें खोखली साबित हुईं

दुनिया के सबसे ऊंचे आयुध डिपो में ही सबसे ऊंचा फ्यूल डिपो है. जिसके टैंक की क्षमता तीन लाख लीटर है और इसमें लगातार टैंकरों से तेल स्टॉक किया जा रहा है. ये तैयारी चीन को सबक सिखाने की है. ये तैयारी है रेड आर्मी को LAC से भगाने की. आपको बता दें कि जो चीन सर्दी की दुहाई देकर पूर्वी लद्दाख से पीछे हटने की बात करता है. ठंड के मौसम के मुताबिक भारतीय सेना के खाने पीने को कमतर बताता है. तो चीन ये जान ले कि लद्दाख की चोटियों पर सामान से भरे इंडियन आर्मी के सैकड़ों ट्रक बेधड़क चढ़ रहे हैं.

इंडियन आर्मी के पास अगले 14 महीने की तैयारी

आपको बता दें कि माउंटेन वारफेयर में चीनी आर्मी भारतीय सैनिकों के सामने कहीं नहीं चल पाती. पिछले दिनों जिसका सबूत भी दुनिया देख चुकी है. जिनपिंग की आर्मी हिमालय पर चारों तरफ से घिर चुकी है और इसी बौखलाहट में किसी तरह से LAC से पीछा छुड़ाना चाह रही है. सर्दी के नाम पर ही भारत को कमजोर बता रही है. जबकि अभी लद्दाख में भारतीय फौज के पास अगले 14 महीने की तैयारी है और माइनस पचास डिग्री का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त कपड़े भी.

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