भारत का चीन को साफ संदेश- शांति अपनाओ, दोस्ताना संबंध निभाओ… नहीं तो इसबार ना चाय मिलेगी ना झूला झुलाएंगे

पैंगोंग लेक के उत्तरी किनारे पर भी अब भारतीय सेना फिंगर 3 की रिज लाइन पर बैठी है और फिंगर 4 से 8 तक चीन की हरकतों को मॉनीटर कर रही है. तनातनी वाले अन्य इलाकों में भी भारत की तैयारी चीन के बंदोबस्त को मैच करने वाली है.

भारत और चीन के बीच अभी पूर्वी लद्दाख में चल रहे गंभीर तनाव पर कल यानि 15 सितंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोक सभा में एक नपा तुला, विस्तृत और मजबूत बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार शांति चाहती है, लेकिन युद्ध के लिए भी तैयार है. अब फैसला चीन को करना है कि वह क्या चाहता है.

राजनाथ सिंह मृदु और मितभाषी व्यक्ति हैं. हमेशा सोच समझ कर बोलते हैं, इसलिए चीन को उनकी चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए. रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारत ने सैनिक और कूटनीतिक दोनों मंचों से चीन को स्पष्ट कर दिया है कि वह बॉर्डर पर अपनी पहल पर वस्तुस्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है जो भारत को बिलकुल भी मंजूर नहीं है.

गौरतलब है कि भारतीय रक्षा मंत्री ने नाम लेकर उन बॉर्डर पॉइंट्स का जिक्र किया जहां अभी तनातनी चल रही है. उन्होंने गोगरा, पैंगोंग लेक के दोनों किनारों और कोंग्का ला का नाम लिया. इनमें कोंग्का ला एक नया नाम था, जिसका अभी तक कभी भी भारत की तरफ से जिक्र नहीं हुआ था.

भारतीय सेना तैयार, सुरक्षा पर नहीं आने देगी आंच

राजनाथ सिंह ने कहा कि अभी चीन ने LAC पर भारी तादाद में सैनिक और हथियार तैनात कर रखे हैं, जिसके जवाब में भारत ने भी उपयुक्त तैयारी कि है ताकि हमारी सुरक्षा पर किसी तरह की आंच न आए.

राजनाथ सिंह ने बेझिझक चीन को इस तनाव के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि चीन का व्यवहार दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है. उनका कहना था कि चीन द्वारा बॉर्डर पर सैनिकों का जमावड़ा करना 1993 और 1996 में हुए समझौतों की अनदेखी है.

भारतीय रक्षा मंत्री ने जोर दे कर कहा कि 1993 और 1996 में हुए समझौतों में साफ-साफ दोनों पक्षों ने माना था कि LAC का पूरी सावधानी और निष्ठा के साथ सम्मान किया जाएगा और यही दोनों देशों की सीमाओं पर शांति बनाए रखने का आधार होगा. 1993 और 1996 में हुए समझौते भारत और चीन के बीच शांति बनाए रखने के पहले औपचारिक प्रयास थे.

राजनाथ सिंह के अनुसार जहां भारत के सैनिकों ने अक्षरशः इन समझौतों का पालन किया है, वहीं चीन ने ऐसा नहीं किया और यही LAC पर समय-समय पर झड़प का कारण रहा है. 1993 के समझौते के आधार पर ही भारत और चीन के बीच औपचारिक रूप में LAC को मान्यता मिली थी. यह समझौता LAC को शांत रखने का आधार है.

इसमें कहा गया है कि “जब तक सीमा निर्धारण का प्रश्न हल नहीं हो जाता, दोनों पक्ष एक दूसरे के विरुद्ध न तो बल प्रयोग करेंगे न बल प्रयोग करने की धमकी देंगे. दोनों पक्ष LAC का पूरा आदर करेंगे और कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे LAC की अवहेलना हो.”

समझौतों की अनदेखी कर जानबूझकर उकसा रहा है चीन

1996 का समझौता और साफ तरीके से कहता है कि LAC पर गोलाबारी नहीं की जाएगी. इसके अनुसार कोई भी पक्ष LAC के 2 किलोमीटर अंदर तक फायरिंग कि शुरुआत नहीं करेगा. दोनों पक्ष यहां पर कम से कम सैनिक तैनात करेंगे और टैंकों, तोपों, और मिसाइलों की संख्या भी दोनों के बीच सहमति के आधार पर होगी.

यही नहीं, 2012 में भारत और चीन ने एक और समझौता किया, जिसे WMCC (Working Mechanism for Consultation and Coordination on China India Border Affairs) के नाम से जाना जाता है. इसका मकसद दोनों देशों के बॉर्डर पर शांति बनाए रखना था. फिर 2013 में BDCA  (Border Defense Cooperation Agreement) पर दस्तखत किए गए, जिसमे साफ कहा गया है कि दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे की पैट्रोल पार्टियों का पीछा नहीं करेंगे.

इस एग्रीमेंट का 7वां अनुच्छेद साफ करता है कि अगर दोनों देशों के सैनिक ऐसी जगह, जहां LAC पर दोनों में मतभेद हैं, एक दूसरे के आमने सामने आ जाएं तो दोनों पक्ष पूरा संयम बरतेंगे, उकसाने वाली कोई कार्रवाई नहीं करेंगे, बल प्रयोग या बल प्रयोग करने की धमकी नहीं देंगे, एक दूसरे के साथ आदर भरा व्यवहार करेंगे और गोलीबारी और सशस्त्र संघर्ष से बचेंगे.

अब आप खुद ही फैसला कीजिए कि जब भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए हुए समझौते इतनी सफाई से सभी आशंकाओं और खतरों का समाधान स्पष्ट करते हैं, तब इस बात की गुंजाइश ही कहां है कि कोई पक्ष इनका उल्लंघन करे. तो साफ है कि चीन जो भी कर रहा है वह पूरी तरह से सोचा समझा है और वर्तमान कार्रवाई में उसकी बुरी नीयत साफ दिख रही है.

ऐसा सबक मिलेगा कि हर हिमाकत से पहले 10 बार सोचेगा चीन

राजनाथ सिंह ने भारत की संसद में जो कुछ कहा वह स्पष्ट करता है कि भारत इस बार तैयार है कि चीन अगर कोई दुस्साहस करता है तो उसे ऐसा सबक मिलेगा कि भविष्य में वह कोई भी हिमाकत करने से पहले दस बार सोचे. पूर्वी लद्दाख में जो स्थिति बनी है, उसे दो भागों में बांटा जा सकता है. एक वह जो अगस्त 29 के पहले थी और दूसरी वह, जो 30 अगस्त के बाद बनी.

29 अगस्त के पहले भारत रक्षात्मक मुद्रा में था, लेकिन 30 अगस्त के बाद, एक बार जब पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे पर उसने पहाड़ों की ऊंचाइयों को अपनी निगरानी में ले लिया, उसके बाद पासा पलट गया. चीन तब से लगातार कोशिश कर रहा है कि भारत को इन चोटियों से पीछे हटाया जाए, लेकिन उसकी हर चाल फेल हो रही है.

पैंगोंग लेक के उत्तरी किनारे पर भी अब भारतीय सेना फिंगर 3 की रिज लाइन पर बैठी है और फिंगर 4 से 8 तक चीन की हरकतों को मॉनीटर कर रही है. तनातनी वाले अन्य इलाकों में भी भारत की तैयारी चीन के बंदोबस्त को मैच करने वाली है. चीन के लिए राजनाथ सिंह का संदेश साफ है. शांति का रुख अख्तियार करो और दोस्ताना संबंधों को निभाओ, नहीं तो इस बार न चाय मिलेगी न झूला झुलाएंगे.

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