डगमगा रही है भारतीय अर्थव्यवस्था, जल्द सुधरने के भी आसार नहीं: अभिजीत बनर्जी

अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफलो, दोनों की शादी 2015 में हुई थी और उन्होंने साथ मिलकर ‘गुड इकोनॉमिक्स इन हार्ड टाइम्स’ लिखी जो इसी हफ्ते बाजार में आने वाली है.

अर्थशास्त्र के लिए 2019 का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था डंवाडोल स्थिति में है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि मौजूदा आंकड़ों को देखें तो सुधार की कोई गुंजाइश दूर-दूर तक नहीं दिखती.

उन्होंने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति डगमगाती हुई है. मौजूदा हालात में विकास के आंकड़ों को देखें तो भविष्य में सुधार को लेकर निश्चिंत भी नहीं हुआ जा सकता है.’

बनर्जी ने अमेरिका में एक समाचार चैनल को बताया, ‘पिछले पांच-छह वर्षों में, हमने कम से कम कुछ विकास तो देखा, लेकिन अब वह आश्वासन भी खत्म हो गया है.’

58 वर्षीय अर्थशास्त्री बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफलो और अमेरिका के अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है. उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी भी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी जल्दी नोबेल पुरस्कार मिल जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले 20 वर्षों से शोध कर रहा था. हमने गरीबी उन्मूलन के लिए समाधान देने की कोशिश की.’

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अभिजीत बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफलो के साथ नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गयी है. वो अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं.

इसी इन्स्टीट्यूट में बनर्जी अपनी पत्नी एस्थर के पीएचडी सुपरवाइजर भी रहे हैं. बनर्जी वर्तमान में एमआईटी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं. 1990 में जोशुआ एंगरिस्ट के साथ वह डुफ्लो के पीएचडी सुपरवाइजर थे. पीएचडी शोध निबंध में वह इस निष्कर्ष पर पहुंची थीं कि विकासशील देशों में ज्यादा शिक्षा पाने वालों को ज्यादा वेतन मिलता है.

दोनों की शादी 2015 में हुई थी और उन्होंने साथ मिलकर ‘गुड इकोनॉमिक्स इन हार्ड टाइम्स’ लिखी जो इसी हफ्ते बाजार में आने वाली है.

फ्रांसीसी मूल की डेफ्लो अर्थव्यवस्था में पुरस्कार पाने वाली सबसे युवा और दूसरी महिला हैं. दंपति को हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल क्रेमर के साथ ‘इंट्रोड्यूसिंग न्यू एप्रोच टू ऑब्टेनिंग रिलायबल आंसर्स अबाउट द बेस्ट वेज टू फाइट ग्लोबल पोवर्टी’ की खातिर नोबेल पुरस्कार हासिल हुआ है. डुफलो और बनर्जी ने साथ मिलकर दर्जनों शोध पत्र प्रकाशित करवाएं हैं.

उन्होंने ‘पुअर इकोनॉमिक्स’ नाम से एक और किताब साथ- साथ लिखी है जो गरीबी उन्मूलन पर उनके कार्यों के दशकों पुराने अनुभव का दस्तावेजीकरण है.

बता दें कि अभिजीत बनर्जी उन लोगों में भी शामिल थे, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के मैनिफेस्टो में शामिल बहुचर्चित ‘NYAY’ योजना की रुपरेखा तय की थी.

अभिजीत बनर्जी को नोबेल मिलने के ऐलान के बाद कांग्रेस ने भी उन्हें बधाई दी है. कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘नोबेल पुरस्कार 2019 जीतने के लिए अभिजीत बनर्जी को बधाई. गरीबी दूर करने के लिए किए गए उनके अविश्वसनीय काम पर देश को गर्व है. कांग्रेस पार्टी द्वारा पेश किए गए न्याय कार्यक्रम के महत्वूर्ण सलाहकार थे यह प्रख्यात अर्थशास्त्री.’

और पढ़ें- तिहाड़ जेल में 10 दिन गुजार चुके हैं अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले अभिजीत बनर्जी

और पढ़ें- जैसे ही Nobel Prize का पता चला 40 मिनट की नींद ली, इंटरव्यू में बोले अभिजीत बनर्जी