ब्रिटेन की महारानी से बात करने वाली कॉन्‍सुलर संजीबिता बोलीं- ये सपने के सच होने जैसा

संजीबिता मैकडॉनल्ड ट्रियनग सेन (Sanjibita McDonald Tariang Sen) ने कहा, "महारानी ने बहुत कम सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने धैर्यपूर्वक हम सभी की बातें सुनीं. इंग्लैंड की महारानी के साथ यह बातचीत एक सपने के सच होने जैसा ही था."

कोलकाता स्थित ब्रिटिश उप-उच्चायोग (British Deputy High Commission in Kolkata) में कॉन्‍सुलर संजीबिता मैकडॉनल्ड ट्रियनग सेन ने ब्रिटेन की महारानी एजिलाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) से बात की है. इस दौरान उन्‍होंने महारानी को कोरोनावायरस के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान ब्रिटिश नागरिकों की स्वदेश वापसी को लेकर भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के बारे में बताया.

संजीबिता को चुना गया रानी से बात करने के लिए

संजीबिता मैकडॉनल्ड ट्रियनग सेन (Sanjibita McDonald Tariang Sen) ब्रिटिश उप उच्चायोग में कॉन्‍सुलर हैं, जिनको दुनियाभर के उन तीन लोगों में से एक हैं, जिन्हें शुक्रवार को एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से बात करने के लिए चुना गया.

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भारत-ब्रिटेन के बीच आपसी सहयोग के बारे में बताया

45 वर्षीय सेन ने कहा कि ब्रिटेन की रानी देश से ब्रिटिश नागरिकों की स्वदेश वापसी के बारे में जानना चाहती थीं. उन्होंने महारानी को बताया कि कोरोनामहामारी (Coronavirus) की चुनौती के दौरान किस तरह भारत-ब्रिटेन के अधिकारियों के बीच सहयोग के जरिये ब्रिटेन के फंसे हुए यात्रियों को उनके देश वापस भेजने में मदद की गई. उन्होंने कहा कि ‘स्वदेश वापसी के लिये उड़ानों का मैनेजमेंट करना एक बड़ा और कठिन अभियान था, जिसे योजनाबद्ध तरीके और आपसी सहयोग से पूरा किया गया.

केंद्र और राज्य सरकार ने की थी मदद

उन्होंने बताया, “मणिपुर के सुदूर गांव में फंसी एक युवा ब्रिटिश महिला को हम दिल्ली लाए थे. लॉकडाउन के दौरान उसे सड़क मार्ग से दिल्ली लाना एक चुनौती भरा काम था. महिला को दिल्ली तक पहुंचने के लिए चार रातों तक सड़क मार्ग के जरिए लगभग 3,000 किमी की यात्रा करनी थी.”

उन्होंने कहा, “केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों ने बहुत मदद की. शुरुआत में कोई भी ड्राइवर इस लंबे समय तक ड्राइव करने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हमारी बहुत मदद की.” उन्होंने यह भी बताया कि मार्च में लॉकडाउन लागू होने के बाद से लगभग 18,000 ब्रिटिश नागरिकों की स्वदेश वापसी कराई गई है.

रानी से बात करने का एक्सपीरियंस

इसी के साथ सेन ने महारानी से 20 मिनट की लंबी बातचीत के बारे में भी अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि कॉल शुरू होने से पहले उन्हें काफी घबराहट हुई, लेकिन महारानी ने बहुत विनम्रता से बात की. इस दौरान ऐसा लगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति से बात कर रही हैं, जिसे वह सालों से जानती हैं. उन्होंने कहा, “महारानी ने बहुत कम सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने धैर्यपूर्वक हम सभी की बातें सुनीं. इंग्लैंड की महारानी के साथ यह बातचीत एक सपने के सच होने जैसा ही था.”

‘कॉल से पहले काफी एक्साइटेड थीं’

सेन ने एक हफ्ते पहले वीडियो कॉन्फ्रेंस के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि वह इसके लिए बहुत एक्साइटेड थीं. वह कॉल के लिए सभी व्यवस्थाओं को देखती रहीं. उन्होंने कहा कि उन्हें इस दिन का बेसब्री से इंतजार था. केवल वह ही नहीं, बल्कि उनके डिपार्टमेंट के सभी कर्मचारी भी इसे लेकर काफी एक्साइटेड थे.

कई संस्कृतियों से रखती हैं ताल्लुक

बता दें कि सेन मुंबई आतंकवादी हमले (2008) के दौरान ब्रिटिश नागरिकों को वापस उनके देश भेजने के लिए भी प्रमुख अधिकारी के रूप में काम कर चुकी हैं. उनका परिवार कई संस्कृतियों और परंपराओं से संबंध रखता है, जैसे- उनके पिता शिलांग से हैं और उनकी मां स्कॉटिश हैं. वहीं सेन की शादी एक बंगाली से हुई है और वह कोलकाता में रहती हैं.

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