एलएसी पर तनाव के बीच चीनी विदेश मंत्री से मिले एस जयशंकर, करीब ढाई घंटे चली बैठक

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, “भारत (India) और चीन (China) इस स्थिति का समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक व सैन्य स्तर पर एक-दूसरे के संपर्क में हैं. रक्षा मंत्रियों की मुलाकात के दौरान इस पर सहमति बनी थी.

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  • Publish Date - 7:13 pm, Thu, 10 September 20
भारत चीन को अलग-थलग करने के लिए अपनी इंडो-पेसिफिक और आसियान नीतियों को एक साथ ला रहा है.

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S Jaishankar) गुरुवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी (Wang Yi) से मॉस्को (Moscow) में मुलाकात की. दोनों नेताओं से बीच मॉस्को में चल रही एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर मुलाकात हुई. दोनों नेताओं के बीच रात के करीब आठ बजे कांग्रेस पार्क वोलकोंस्की होटल में बैठक शुरू हुई और करीब साढ़े दस बजे खत्म हुई. इस मुलाकात से ठीक पहले विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर भी दोनों नेता चर्चा करेंगे.

भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच ऐसे समय में मुलाकात हुई जब एलएसी पर तनाव काफी बढ़ा हुआ है. दरअसल, मई महीने से एलएसी पर बढ़ा तनाव भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद अबतक खत्म नहीं हो पाया है.

मालूम हो कि एक हफ्ते पहले ही भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच एससीओ मीटिंग के दौरान ही मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात के दौरान एलएसी पर तनाव कम करने को लेकर बातचीत की गई. रक्षा मंत्रियों की बातचीत के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही विदेश मंत्री स्तर पर भी मुलाकात हो सकती है.

एलएसी पर चीन की उकसावेभरी कार्रवाई जारी

एक तरफ जहां भारत और चीन के बीच कूटनीतिक व सैन्य स्तर पर बातचीत का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना लगातार उकसावेभरी कार्रवाई कर रही है. चीनी सेना लगातार भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ जानकारों का यहां तक कहना है कि मौजूदा समय में हालात बहुत गंभीर हो चुके हैं.

‘तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध’

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, “भारत और चीन इस स्थिति का समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक व सैन्य स्तर पर एक-दूसरे के संपर्क में हैं. रक्षा मंत्रियों की मुलाकात के दौरान इस पर सहमति बनी थी. ईएएम जल्द ही चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात करेगा और आगे की चर्चा की जाएगी. भारत सीमा पर बने तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है.”

2001 में हुई शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत

बता दें कि शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) की शुरुआत 2001 में शंघाई में हुई थी. इसे रूस, चीन, किर्गीज रिपब्लिक, कजाकिस्तान, तजाकिस्तान और उजेबकिस्तान के प्रेसिडेंट ने मिलकर किया था. भारत और पाकिस्तान को 2005 में ऑब्जर्वर के तौर पर ग्रुप में शामिल किया गया था. दोनों देशों को 2017 में पूर्ण सदस्यता मिली थी.