‘ऑपरेशन ग्रीनबर्ड’ के जरिए भारत को 15 अगस्त से पहले दहलाने की फिराक में थे आतंकी, साजिश नाकाम

पिछले कई महीनों से आतंकी संगठन ISIS अपनी इस नापाक हरकत को अंजाम देने में लगा था लेकिन मई में जैसे ही...

नई दिल्ली: भारतीय खुफिया एजेसियों ने 13 अगस्त को दिल्ली समेत तीन शहरों में होने वाले धमाकों की साजिश को नाकाम कर दिया. धमाकों की ये खौफनाक साजिश दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन ISIS ने तैयार की थी और इस साजिश को नाम दिया गया था ‘ऑपरेशन ग्रीनबर्ड’.

पिछले कई महीनों से आतंकी संगठन ISIS अपनी इस नापाक हरकत को अंजाम देने में लगा था लेकिन मई में जैसे ही भारतीय जांच एजेंसियों को इसकी भनक लगी, ऑपरेशन ग्रीन बर्ड की गर्दन मरोड़ दी गयी.

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, दूसरा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का खात्मा और तीसरा जश्न-ए-आजादी यानी स्वतंत्रता दिवस की तैयारी करता हिंदुस्तान. ये सब आतंकी संगठन ISIS की आंखों में खटक रही थी, लिहाजा आतंकी संगठन ने रची थी 15 अगस्त पर आजादी के जश्न में खलल डालने की खौफनाक साजिश.

क्या है ऑपरेशन ग्रीन बर्ड?
सवाल ये है कि आखिर क्या है आईएसआईएस का ऑपरेशन ग्रीन बर्ड? क्या हैं इसके मायने? अगर वक्त रहते नहीं खुलता ऑपरेशन ग्रीन बर्ड का राज, तो क्या हो सकता था इसका अंजाम? भारतीय जांच एजेंसी ने एक-एक कर इस ऑपरेशन ग्रीन बर्ड के तमाम कोड डिकोड किए.

लेकिन सबसे पहले आइए आतंक की इस खौफनाक साजिश के टेलीग्राम मैसेज के चंद पन्नों पर नजर डाल लेते हैं.
साज़िश नंबर 1 – बंगाली 138, साज़िश नंबर 2 – इस्लामी हिंद, साज़िश नंबर 3 – फ्लेम्स ऑफ वॉर (21), साज़िश नंबर 4 – अल-मुतरजिम फ़ाउंडेशन.

सबसे आख़िर में सबसे बड़ी और सबसे सबसे ख़ौफ़नाक… साज़िश नंबर 5 – ऑपरेशन ‘ग्रीन बर्ड्स’.

सोशल मीडिया के इस टेलीग्राम एप्प के ये मैसेज किसके हैं, इनका मतलब क्या है, साथ ही साज़िश के इन पन्नों में आख़िर वो कौन सी बातें लिखी हैं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया?

टेररिस्ट ग्रुप्स की हर हरकत पर पैनी निगाह रखने वाली हिंदुस्तान की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी की 29 अप्रैल 2019 में एक टेलीग्राम ग्रुप पर नजर पड़ी. इस ग्रुप में लिखे गए कंटेंट को देखते ही सुरक्षा एजेंसी समझ गयी कि इनका मकसद न सिर्फ हिंदुस्तान पर अटैक करना है बल्कि इसके लिए आतंकियों की रिक्रूटमेंट करना भी है.

नौजवानों के मन में घोल रहे थे जेहाद का जहर
ग्रुप के एक एक पेज को देखकर साफ था कि कैसे ये आतंकी नौजवानों के मन में जेहाद का जहर घोल रहे थे, कैसे आतंकी साजिश के साथ धोखा करने पर उन्हें जान से हाथ धोने की धमकी दे रहे थे. इस ग्रुप को देखकर साफ हो चुका था कि जिहाद का जहर नौजवानों के दिमाग मे घोलने के बाद कैसे इस तरह के आतंकी ग्रुप्स में मेम्बरों की संख्या लगातार बढ़ रही थी.

बंगाली 138, इस्लामी हिंद, फ्लेम्स ऑफ वॉर से लेकर ग्रीन बर्ड्स जैसे ग्रुप लगातार जेहादी मेंबर जुड़ रहे थे. लेकिन आतंकी संगठन अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे पाता इससे पहले ही आतंकी की इस साजिश का भंडाफोड़ हो गया.

सुरक्षा एजेंसी के लिए हैरान कर देने वाली फोटो थी लालकिले पर ब्लास्ट की, जिसे आतंकियों ने अपने इस टेलीग्राम ग्रुप में शेयर किया था, जिस पर लिखा था कि जल्द ही हिन्दुस्तान को भी इस्लाम की हुकूमत यानी खिलाफत का हिस्सा बना लिया जाएगा.

कोडवर्ड में आतंकी करते से बातचीत
साथ ही खुद को ISIS का हिस्सा बताने वाले आतंकी इस ग्रुप में साजिश के बारे में बात करते हुए कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे, उन्हें कहीं न कहीं डर था कि कोई मेंबर सुरक्षा एजेंसियों की इसकी मुखबरी न कर दे. इसीलिए वो सभी मेंबरों को मुखबरी का अंजाम मौत होने का डर भी दिखाते थे. लेकिन, हुआ वही, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इसका खुलासा हो गया, और आतंकी साजिश अंजाम से पहले ही दम तोड़ गयी.

इतना ही नहीं, जब सुरक्षा एजेंसियों ने Gfx इन ऑपरेशन ग्रीन बर्डस को डिकोड किया तो पता चला कि ग्रीन का मतलब दिल्ली, भोपाल और त्रिवेन्द्रम था, जहां आतंकी ब्लास्ट की तैयारी कर रहे थे. जबकि बर्ड्स B1RDS लिखा था जिसमें आई की जगह वन लिखा था. और इसमें बी-1 मतलब था रेल का कोच नंबर बी-1.

आर का मतलब था राजधानी एक्सप्रेस. जबकि डीएस का मतलब था दिल्ली साउथ. Gfx आउट मतलब ये कि आतंकी साउथ दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर राजधानी एक्सप्रेस के कोच बी-1 को टारगेट करने वाले थे.

इन धमाकों के लिए ये आतंकी संगठन अपने जेहादियों को न सिर्फ ट्रेनिंग देने की तैयारी कर रहा था, बल्कि बिस्फोटक का जुगाड़ भी तलाश रहा था, लेकिन इससे पहले ही सुरक्षा एजेंसी ने इस साजिश को बेपर्दा कर दिया.

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