भारतीय वैज्ञानिकों ने Hydroxychloroquine को लेकर लांसेट की रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल

लांसेट (Lancet) की रिपोर्ट में 20 दिसंबर से 14 अप्रैल के बीच COVID के पीसीआर से कनफर्म्ड केस का विश्लेषण (Analysis) किया गया है. जबकि चीन के वुहान में 31 दिसंबर 2019 को निमोनिया का केस सामने आया था.
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भारतीय वैज्ञानिकों ने HCQ (Hydroxychloroquine) को लेकर लांसेट की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं. वैज्ञानिकों ने कहा है कि WHO का क्लीनिकल ट्रायल रोकना हड़बड़ी में लिया गया फैसला है.

CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) के DG, IGIB (Institute of Genomics and Integrative Biology) के डायरेक्टर और चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर ने लांसेट में HCQ के ट्रायल के बाद उसके विपरीत असर को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं, और रिपोर्ट का खंडन किया है.

इस संबंध में WHO और लांसेट के एडिटर को चिट्ठी लिखी गई है. चिट्ठी के जरिए कहा गया है कि HCQ के ट्रायल को रोका जाना गलत है.

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लांसेट की रिपोर्ट में 20 दिसंबर से 14 अप्रैल के बीच COVID के पीसीआर से कनफर्म्ड केस का विश्लेषण (Analysis) किया गया है. जबकि चीन के वुहान में 31 दिसंबर 2019 को निमोनिया का केस सामने आया था. वहीं 5 जनवरी, 2020 विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नए वायरस पर पहली बीमारी फैलने की खबर प्रकाशित की थी.

वहीं 20 जनवरी, 2020 को अमेरिका में पहला संक्रमण का मामला सामने आया था. ऐसे में 20 दिसंबर से आंकड़ों का विश्लेषण करना गलत है. डेटा लेने में ही गलती हुई.

लांसेट की स्टडी के मुताबिक, 14888 अस्पताल में भर्ती COVID-19 के मरीजों को जब HCQ दिया गया तो इसका कोई फायदा नहीं दिखा बल्कि डेथ का रिस्क हाई हो गया और हार्ट संबधी समस्या दिखी. इसके बाद सेफ्टी के मद्देनजर WHO ने HCQ के क्लीनिकल ट्रायल पर रोक लगा दी.

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