Mylan लॉन्च करेगा Remedisvir का इंडिजिनस वर्ज़न, Covid-19 के इलाज में मानी गई कारगर

हाल ही में अमेरिका (America) में रेमेडिसविर का ट्रायल पूरा हुआ है. इस दवा को अमेरिका में कोरोनावायरस (Coronavirus) के इलाज के लिए काफी कारगर माना जा रहा है. रेमेडिसविर (Remedisvir) को अभी तक जहां भी इस्तेमाल किया गया, वहां संक्रमित मरीजों की सेहत में सुधार देखने को मिला.
Remedisvir drug for corona treatment, Mylan लॉन्च करेगा Remedisvir का इंडिजिनस वर्ज़न, Covid-19 के इलाज में मानी गई कारगर

दुनिया में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक भारत के लिए एक अच्छी खबर है. दवा बनाने वाली कंपनी मायलन (Mylan) के मुताबिक, इसी महीने रेमेडिसविर दवा (Remedisvir) का इंडिजिनस वर्ज़न गिलियड साइंसेज इंक के नाम से कोरोनावायरस संक्रमण के इलाज के लिए 4,800 रुपये (64.31 डॉलर) प्रति 100 मिलीग्राम शीशी के रूप में लॉन्च किया जाएगा.

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कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने मायलन के रेमेडिसविर के इंडियन वर्ज़न को मंजूरी दे दी है.

सिप्ला और हेटेरो कंपनी की दवाओं के रेट

मायलन का वर्ज़न दो भारतीय दवा निर्माता कंपनी सिप्ला लिमिटेड (Cipla) और प्राइवेट तौर पर आयोजित हेटेरो लैब्स लिमिटेड (Hetero) के बाद आता है, जिन्होंने दवा के अपने सामान्य वर्ज़न लॉन्च किए. सिप्ला अपने वर्जन सिप्रेम (Ciprame) को 5,000 रुपये से कम कीमत पर देगी, जबकि हेटेरो ने इसके वर्ज़न कोविफोर (Covifor) की कीमत 5,400 रुपये रखी है.

दवा बनाने के लिए गिलियड ने किया इन कंपनियों से समझौता

गिलियड (Gilead Sciences Inc) ने रेमेडिसविर बनाने और बेचने के लिए कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड के रूप में सूचीबद्ध (लिस्टेड), इंडिया की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड, जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड, सिनजेन इंटरनेशनल लिमिटेड और जाइडस कैडिला के साथ लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे पहले भारत की दो फार्मा कंपनियों ने रेमडेसिविर बनाने वाली अमेरिकी कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया.

रेमेडिसविर दवा को अमेरिका ने माना कारगर

हाल ही में अमेरिका (America) में रेमेडिसविर का ट्रायल पूरा हुआ है. रेमेडिसविर दवा को अमेरिका में कोरोनावायरस के इलाज के लिए काफी कारगर माना जा रहा है. अमेरिका में इबोला वायरस (Ebola virus) के मरीजों के लिए बनाई गई रेमेडिसविर दवा कोरोना के संक्रमण को रोकने में मददगार साबित हुई है. इसलिए भारत में इस दवा का निर्माण अब भारत में भी इस दवा को तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

ICMR ने भी बताया इस दवा को असरकारक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सलाहकार डॉक्टर एंथनी फाउसी (Anthony Fauci) ने ट्रायल के बाद कहा था, “आंकड़े बताते हैं कि रेमेडिसविर दवा का मरीजों के ठीक होने के समय में बहुत प्रभावी और पॉजिटिव असर पड़ रहा है.” इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भी इस दवा को कोरोना के खिलाफ कारगार बताया. रेमेडिसविर को अभी तक जहां भी इस्तेमाल किया गया, वहां संक्रमित मरीजों की सेहत में सुधार देखने को मिला. इस दवा के साइड इफेक्ट भी नहीं हैं.

भारत समेत दुनिया के 127 देशों में बिक सकेगी रेमेडिसविर दवा

वैक्सीन (Vaccine) के आने तक यह मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. भारत में सिप्ला और जुबिलेंट लाइफ साइंसेज ने रेमेडिसविर बनाने वाली अमेरिकी कंपनी के साथ करार किया और दवा लॉन्च की और अब मायलन भी इसी क्रम में आ रही है. अब ये कंपनियां भारत समेत दुनिया के 127 देशों में रेमेडिसविर दवा बेच सकेंगी. इतना ही नहीं, ये कंपनियां दवा के उत्पादन के बाद अपने ब्रांड के नाम का भी इस्तेमाल कर सकेंगी.

रेमेडिसविर एक जेनेरिक दवा है, इसलिए इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं है. ऐसे में यह भारत के लिए राहत ला सकती है. इस दवा को भारत में कितने रुपये में बेचा जाएगा, ये दोनों कंपनियां तय करेंगी.

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