भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होगी ‘नाग’ मिसाइल, इतना अचूक निशाना कि ‘मारो और भूल जाओ’

राजस्थान के पोखरण में 'नाग' मिसाइल का दिन और रात दोनों समय परीक्षण किया गया. सेना के सूत्रों के अनुसार, इस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ने अपने डमी टारगेट पर अचूक निशाना साधा. अब माना जा रहा है कि इसे भारतीय सेना में जल्द शामिल किया जा सकता है.

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने तीसरी पीढ़ी के एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. ये परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया. इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है.

थर्ड जेनरेशन गाइडेड एंटी-टैंक मिसाइल नाग का उत्पादन इस साल के अंत में शुरू हो जाएगा. अब तक इसका ट्रायल चल रहा था. साल 2018 में इस मिसाइल का विंटर यूजर ट्रायल (सर्दियों में प्रयोग) किया गया था. नाग का निर्माण भारत में मिसाइल बनाने वाली अकेली सरकारी कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड (हैदराबाद) करेगी.

राजस्थान के पोखरण में ‘नाग’ मिसाइल का दिन और रात दोनों समय परीक्षण किया गया. सेना के सूत्रों के अनुसार, इस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ने अपने डमी टारगेट पर अचूक निशाना साधा. अब माना जा रहा है कि इसे भारतीय सेना में जल्द शामिल किया जा सकता है.

एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल या सेना की ज़ुबान में कहें ATGM ये एक ऐसा रॉकेट है जिसे गाइड करके निशाने पर साधा जाता है. भारत ने 1980 के दशक में Integrated Missile Development Programme शुरू किया था. अग्नि, पृथ्वी, आकाश और त्रिशूल के साथ नाग मिसाइल भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा थी. नाग मिसाइल प्रोजेक्ट 30 साल पुराना है लेकिन अब इसमें सफलता मिल रही है. अच्छी बात ये है कि आज इसकी दुनिया की सबसे बेहतरीन एंटी टैंक मिसाइलों से तुलना की जा सकती है.

तीसरी पीढ़ी की नाग मिसाइल 4 किलोमीटर की दूरी तक हमला कर सकती है. अब ये मिसाइल सेना में शामिल किये जाने के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. वर्ष 2018 में सरकार ने सेना के लिये स्वदेशी नाग मिसाइल ख़रीदने को मंज़ूरी दी थी. तब सरकार ने नाग मिसाइल के लिये 524 करोड़ रुपये मंज़ूर किये थे. इसके तहत सेना के लिये 300 से ज़्यादा नाग मिसाइल खरीदी जाएंगी.

इसमें 25 नामिका कैरियर वेहिकल भी होंगे जो नाग मिसाइल से लैस होंगे. भविष्य में सेना तकरीबन 8000 नाग मिसाइल के लिये ऑर्डर दे सकती है. भारतीय सेना को अगले 20 वर्षों में 68 हजार से ज्यादा एंटी टैंक मिसाइल की जरूरत होगी. इस लिहाज से नाग को भारतीय सेना का भविष्य कहा जा रहा है.

इससे पहले भारत की इज़रायल से स्पाइक एंटी टैंक मिसाइल ख़रीदने की बात चल रही थी. लेकिन DRDO ने सरकार को भरोसा दिलाया था कि जल्द ही नाग मिसाइल को तैयार कर लिया जाएगा और उसमें वो सभी ख़ूबी होंगी, जो तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक मिसाइल में होती हैं. इसके बाद स्पाइक मिसाइल को लेकर बात ख़त्म हो गई थी.

नाग मिसाइल हल्की है, मज़बूत है, Composite मैटेरियल से बनी है. ये 230 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से अपने टारगेट की तरफ बढ़ती है और अपनी रेंज यानी 4 किलोमीटर की दूरी 16 सेकेंड में तय कर लेती है. मौसम कैसा भी हो, दिन हो या रात, लक्ष्य स्थिर हो या फिर तेज रफ्तार से बचने की कोशिश करे, नाग का निशाना अचूक होता है.

जमीन से छोड़े जाने वाले नाग सिस्टम की रेंज 4 किलोमीटर तक है जबकि अटैक हेलीकॉप्टर से लॉन्च की जाने वाले इसके वर्ज़न हेलीना की रेंज 8 किलोमीटर है. नाग वो एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जो पूरी तरह भारत में बनी है.

कैसे करेगी काम ‘नाग’ मिसाइल

1- एंटी टैंक मिसाइल यानी टैंक पर हमला करने वाली मिसाइल
2- ये मिसाइल टैंक के बख़्तर को भेदने की ताक़त रखती है
3- एंटी टैंक मिसाइल 4 पीढ़ी में बांटी जाती हैं
4- पहली जेनरेशन यानी – जब मिसाइल Wire और Joystick से गाइड की जाती है
5- दूसरी जेनरेशन वाली ATGM भी तार से गाइड की जाती है, लेकिन इसमें टेलिस्कोपिक साइट का इस्तेमाल करता है.
6- तीसरी जेनरेशन Fire and Forget सिस्टम और Wire Guidance की जगह Infra Red Homing यानी टार्गेट की गर्मी को देखकर निशाना बनाया जाता है
7- चौथी जेनरेशन में मिसाइल Top angle से अटैक करती है, यानी टैंक के सबसे नाज़ुक हिस्से उसकी छत पर मिसाइल वार करती है, ये दागे जाने के बाद अपना टारगेट भी बदल सकती हैं. जैसे अमेरिकी जैवलिन और इज़रायल की स्पाइक मिसाइल हैं.