CJI के खिलाफ यौन शोषण जांच पैनल में शामिल हुईं वकील इंदिरा जयसिंह

वरिष्‍ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि "जनहित में जो व्‍यक्ति अदालत के सामने आता है, पहले तो उसकी जांच होनी चाहिए."
इंदिरा जयसिंह, CJI के खिलाफ यौन शोषण जांच पैनल में शामिल हुईं वकील इंदिरा जयसिंह

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के खिलाफ यौन उत्पीड़न (Sexual harassement on CJI) के आरोपों की जांच पैनल की तीन सदस्यों वाली कमेटी से जस्टिस एनवी रमन्ना (Justice N. V. Ramana) के अलग होने के बाद वरिष्‍ठ वकील इंदिरा जयसिंह (Indira Jaising) को जांच पैनल में शामिल किया गया है. इंदिरा जयसिंह ने उत्‍सव बैंस (Utsav Bains) और उनके दावों पर सवाल उठाए थे.

क्यों हटाए गए जस्टिस रमन्ना?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट को लिखे एक पत्र में शिकायतकर्ता ने लिखा था कि जस्टिस रमन्ना को यह पैनल छोड़ देना चाहिए क्योंकि वह CJI के ‘पारिवारिक मित्र’ हैं और उनके करीबी हैं. इसी के साथ महिला ने यह भी कहा था कि पैनल में और अधिक महिला जज होनी चाहिए. जिसके बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इंदिरा जयसिंह को इस पैनल में शामिल किया गया है.

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क्या आरोप लगाए थे इंदिरा जयसिंह ने?

इंदिरा ने आरोप लगाया था कि CJI को बचाने की कोशिश की जा रही है. उन्‍होंने कहा था कि “मेरी राय में, जब तक आरोपी अपने पद पर बरकार है, उसके खिलाफ निष्‍पक्ष जांच कैसे हो सकती है. यह कानून सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में बनाया था.”

इंदिरा ने अपने तर्क में कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में फैसला दिया था. मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट के जज के खिलाफ इन-हाउस जांच चल रही थी. उस फैसले में स्‍पष्‍ट रूप से लिखा है कि जब तक जांच पूरी न हो जाए, तब तक जज को कोई भी प्रशासनिक फैसले करने का अधिकार नहीं है. वही कानून हमारे चीफ जस्टिस को भी लागू करना चाहिए. जब तक उनके मामले में जांच न पूरी हो जाए, उनको भी प्रशासनिक कर्तव्‍यों का निर्वहन नहीं करना चाहिए. सारे गवाह तो सुप्रीम कोर्ट के ही कर्मचारी ही हैं, किस हिम्‍मत से आकर वो सबूत देंगे? इसलिए जरूरी है कि सीजेआई खुद को ड्यूटी से अलग कर लें. अपने आप कर लेंगे तो अच्‍छा होगा.”

क्या दावा किया था बैंस ने?

बैंस ने एक हलफनामा दाखिल कर दावा किया था मुख्य न्यायाधीश को एक झूठे मामले में फंसाया जा रहा है. उन्होंने मामले में एक एयरलाइन संस्थापक, गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और एक कथित फिक्सर को इसके लिए जिम्मेदार बताया और दावा किया कि एक अजय नामक व्यक्ति ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने दावा किया था कि सीजेआई गोगोई को यौन शोषण के झूठे आरोपों में फंसाने की साजिश की जा रही है. बैंस के इन दावों की जांच पूर्व जस्टिस एके पटनायक करेंगे.

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इंदिरा ने उठाए थे बैंस पर सवाल

इंदिरा ने कहा कि “ये उत्‍सव बैंस कौन हैं, पहले हमें इस बात का खुलासा करके दीजिए. क्‍योंकि जनहित में जो व्‍यक्ति अदालत के सामने आता है, पहले तो उसकी जांच होनी चाहिए. मैं जस्टिस पटनायक से ये गुजारिश करूंगी कि आपकी जांच शुरू होने से पहले इस उत्‍सव बैंस की जांच करके आश्‍वासन दो कि ये व्‍यक्ति जो कह रहा है, उसमें दम है.”

क्या है घटनाक्रम

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्सव बैंस नाम के वकील को नोटिस जारी कर अदालत में पेश होने को कहा. उत्सव ने दावा किया था कि सीजेआई को इस्तीफा देने पर मजबूर करने के लिए उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का झूठा केस करना एक साजिश है. उत्सव के मुताबिक इसके लिए उन्हें पैसे का ऑफर भी दिया गया था ताकि वे आरोप लगाने वाली महिला का केस अपने हाथ में ले लें और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामला सामना रखें. खबर के मुताबिक कोर्ट ने उत्सव से कहा है कि वे अपने ये आरोप साबित करने के लिए सबूत पेश करें.

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26 अप्रैल को होगी पहली सुनवाई

इस मामले की पहली सुनवाई शुक्रवार (26 अप्रैल) को होगी और सर्वोच्च अदालत के महासचिव को भी सभी दस्तावेजों और सामग्री के साथ तैयार रहने को कहा गया है. जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया नहीं होगी. इसमें आंतरिक जांच होगी जिसमें विभिन्न पक्षों को अपने वकीलों की ओर से प्रतिनिधित्व नहीं देना होगा.

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