भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जॉइंट फील्ड सर्वे टीम ने शुरू किया मेजरमेंट

राज्य के बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी विभाग के इंजीनियर बब्बन सिंह (Babban Singh) ने कहा, "जॉइंट सर्वे टीम ने भारत-नेपाल सीमा (India- Nepal Border) के कुछ स्थानों का मेजरमेंट कर दिया है. हालांकि संबंधित विभागों को रिपोर्ट सौंपने के बाद ही आगे की चीजें स्पष्ट हो पाएंगी."
India-Nepal measure on border dispute, भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जॉइंट फील्ड सर्वे टीम ने शुरू किया मेजरमेंट

भारत-नेपाल (India and Nepal) के बीच चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भारत-नेपाल संयुक्त फील्ड सर्वे टीम ने जमीन को मापने (Measurement) का काम शुरू कर दिया है. इस क्रम में भारत-नेपाल सीमा पर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले (East Champaran District) के ढाका ब्लॉक में मेजरमेंट का काम शुरू किया गया है.

अधिकारियों के अनुसार, देहरादून के दो-सदस्यीय सर्वे टीम ने नेपाल के अपने समकक्षों के साथ गुरुवार से जिले के सिकरहना सब-डिविजन के ढाका ब्लॉक (Dhaka Block) के अंदर आने वाले बलुआ गुआबरी पंचायत के बलुआ गांव में जमीन का मेजरमेंट शुरू किया है.

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ईस्ट चंपारण के जिला मजिस्ट्रेट (DM) कपिल अशोक (Kapil Ashok) ने कहा, “दोनों देशों की सर्वे टीम ने पिछले दो दिनों में गुरुवार और शुक्रवार को सर्वे किया. इस मामले में अंतिम रिपोर्ट अगले 10 दिनों में पेश की जा सकती है.”

बांध की जमीन पर नेपाल ने किया था अपना दावा

ऐसा कदम तब उठाया गया जब पिछले महीने नेपाल ने बिहार के पूर्वी चंपारण के ढाका ब्लॉक में स्थित बलुआ गुआबारी पंचायत के पास लालबकेया नदी (Lalbakeya River) पर बांध (Dam) की मरम्‍मत के कार्य को रोक दिया था. नेपाल का कहना था कि यह बांध उसकी जमीन पर बनाया जा रहा है.

नेपाल के अधिकारी ने दावा किया था कि बांध के निर्माण का काम ‘नो मेंस लैंड’ पर किया जा रहा है. यदि नेपाल की माने तो यह विवादित स्थान मोतिहारी जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी उत्तर-पूर्व में इंटरनेशनल बॉर्डर पर स्थित है.

नेपाल की आपत्ति के बाद लालबकेया नदी के दाहिने बांध पर पिलर नंबर 346 और 347 के बीच चल रहे मरम्मत और कटावरोधी कार्यों पर रोक लगा दी गई है. इसे लेकर कपिल अशोक ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) से इस विवाद को सुलझाने के लिए मदद मांगी थी.

बांध के किनारे चल रहे काम के रुक जाने पर ग्रामीण परेशान

बांध के किनारे चल रहे मरम्मत के काम के रुक जाने से स्थानीय ग्रामीणों को चिंता हो रही है. उनका कहना है कि यदि इस मानसून में बांध टूट गया तो गुबरी, बलुवा, भवानीपुर, हीरपुर, महुवा, फुलवरिया, चंदनबाड़ा, डिस्टिया, बरेवा, कुशमहवा, सरथा, और जामवा समेत एक दर्जन से भी ज्यादा गांव बाढ़ में डूब जाएंगे. हालांकि जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को हर मदद देने का आश्वासन दिया है.

राज्य के बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी विभाग (Drainage Department) के इंजीनियर बब्बन सिंह (Babban Singh) ने कहा, “जॉइंट सर्वे टीम ने भारत-नेपाल सीमा के कुछ स्थानों का मेजरमेंट कर दिया है. हालांकि संबंधित विभागों को रिपोर्ट सौंपने के बाद ही आगे की चीजें स्पष्ट हो पाएंगी.” स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि 14 स्थानों पर मेजरमेंट किया गया है.

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