असम घुसपैठियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हर्ष मंदर का नाम याचिका से हटाया

याचिकाकर्ता हर्ष मंदर ने अवैध घुसपैठियों को हिरासत में रखने के मामले की सुनवाई कर रही बेंच से सीजेआई रंजन गोगोई को अलग होने की मांग की थी.

नई दिल्ली: असम में अवैध घुसपैठियों को लंबे समय से हिरासत में रखे जाने के मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई ने एक नया मोड़ ले लिया है. दरअसल इस याचिका के याचिकाकर्ता हर्ष मंदर थे, अब सुप्रीम कोर्ट ने उनका ही नाम याचिका से हटा दिया है. हर्ष मंदर की जगह सुप्रीम कोर्ट ने लीगल सर्विस अथॉरिटी को याचिकाकर्ता बनाया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सलाहकार के तौर पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को नियुक्त किया है.

दरअसल याचिकाकर्ता हर्ष मंदर ने अवैध घुसपैठियों को हिरासत में रखने के मामले की सुनवाई कर रही बेंच से सीजेआई रंजन गोगोई को अलग होने की मांग की थी. उन्होंने ने पिछली सुनवाई के दौरान सीजेआई गोगोई की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए सुनवाई से अलग होने की मांग की थी. हर्ष मंदर का कहना था कि उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस गोगोई की टिप्पणी से लगता है कि उन्होंने मामले को प्री जज कर लिया है.

इसकी सुनवाई करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने हर्ष मंदर को कड़ी फटकार लगाई. सीजेआई गोगोई ने मंदर से कहा कि आपको जजों पर भरोसा रखना चाहिए. कोर्ट की टिप्पणी मामले को समझने के लिए की जाती है. टिप्पणी के आधार पर यह राय बना लेना कि कोर्ट ने बिना सुनवाई किए विचार बना लिया है सही नहीं है. उन्होनें कहा आपने देश के मुख्यन्यायाधीश पर सवाल उठाया है.

सीजेआई ने कहा, ‘अपने जजों पर भरोसा करना सीखो जिसदिन भरोसा करना छोड़ देंगे उस दिन सबकुछ खत्म हो जाएगा.’ मालूम हो कि असम के हिरासत केंद्रों में लंबे समय से कैद विदेशी नागरिकों की स्थिति को लेकर हर्ष मंदर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

ये भी पढ़ें: मेरे पैर पकड़ कर कसमें खाने वाले आज मेरी मां के खिलाफ लड़ रहे हैं: प्रियंका गांधी