IBC: घर खरीदने वालों को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट से रियल एस्‍टेट कंपनियों को लगा ये झटका

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केंद्र सरकार के उस निर्णय को बरकरार रखा जिसके तहत IBC में संशोधन कर होम बायर्स को फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का दर्जा दिया गया था.

  • Piyush Pandey
  • Publish Date - 11:13 am, Fri, 9 August 19
supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण पर 2005 के कानून को 'मील का पत्थर' बताया.

नई दिल्‍ली: घर खरीदने वालों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने 200 रियल एस्टेट कंपनियों की याचिका खारिज की. इन कंपनियों ने Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) संशोधन के खिलाफ याचिका दायर कर संशोधन को गैरकानूनी ओर असंवैधानिक कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केंद्र सरकार के उस निर्णय को बरकरार रखा जिसके तहत IBC में संशोधन कर होम बायर्स को फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का दर्जा दिया गया था. इसके साथ ही होम बायर्स को अधिकार दिया गया है कि वे क्रेडिटर्स की कमेटी में अपना पक्ष रख सकें और रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने का प्रस्ताव पेश कर सकें.

इससे पहले, जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने IBC को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर फैसला देते हुए परिचालन लेनदारों को वित्तीय लेनदारों के समान सुविधाएं देने की दलीलों को अस्वीकार कर दिया था. फैसले ने संहिता की धारा 29ए को बरकरार रखा, जो एक कंपनी के प्रमोटरों को अपने नियंत्रण को पुन: प्राप्त करने के लिए बोली लगाने से दिवालियापन की कार्रवाई का सामना करने से रोकती है.

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