आज से प्रभाव में राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद, दिल्ली एम्स के प्रोफसर सुरेश चंद्र शर्मा बने पहले अध्यक्ष

एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) के ईएनटी विभाग के प्रमुख सुरेश चंद्र शर्मा को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ( NMC) का पहला अध्यक्ष बनाया गया है, एनएमसी को देश के चिकित्सा संस्थानों और चिकित्सकीय पेशेवरों के नियमन के लिए नीतियां बनाने का अधिकार है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

केंद्र सरकार ने भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) को खत्म कर दिया है. इसकी जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) आज से प्रभाव में आ गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से एक अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी गई है. एमसीआई (MCI) को चलाने के लिए बीओजी (BOG) को चार साल पहले नियुक्त किया गया था. आज एमसीआई (MCI) को निरस्त कर दिया गया है.

अधिसूचना में कहा गया है कि एम्स दिल्ली के ईएनटी विभाग के प्रमुख सुरेश चंद्र शर्मा को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का पहला अध्यक्ष बनाया गया है, उनके पास स्नातक चिकित्सा शिक्षा, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग और नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण को नियंत्रित करने के लिए चार स्वायत्त बोर्ड होंगे.

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एनएमसी मेडिकल संस्थानों और प्रोफेशनलों के लिए बनाएगी नीतियां

एनएमसी (NMC) को देश के चिकित्सा संस्थानों और चिकित्सकीय पेशेवरों के नियमन के लिए नीतियां बनाने का अधिकार है. एनएमसी अधिनियम, 2019 के सभी प्रावधान आज से लागू होंगे, जिसमें निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटों पर शुल्क नियंत्रण शामिल है. एनएमसी गैर-एमबीबीएस मध्यम स्तर की स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं जैसे- नर्सिंग चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को दवाइयों के सीमित अधिकारों के साथ नए कैडर के लिए दिशानिर्देश भी बनाएगी.

एनएमसी (NMC) के तहत चार स्वायत्त बोर्डों के अध्यक्षों के नाम भी जारी किए गए हैं – पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख अरुणा वणिकार, किडनी रोग संस्थान के जीआर दोशी, बेंगलौर मेडिकल कॉलेज और रिसर्च संस्थान के सर्जरी प्रमुख एमके रमेश, दिल्ली के बीआर अंबेडकर मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल अंचल गुलाटी और बेंगलौर एनआईएमएचएएनएस (NIMHANS) के डायरेक्टर बीएन गंगाधर चिकित्सा नैतिकता और पंजीकरण बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए हैं

64 साल पुराना भारतीय चिकित्सा परिषद आज से खत्म

भारतीय चिकित्सा परिषद की स्थापना 1934 में की गई थी. इसका काम चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए और भारत और विदेशों की चिकित्सा योग्यता की मान्यता के लिए समान मानकों को स्थापित करना था, अब इसे निरस्त कर दिया गया है. इसकी जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग आज से अस्तित्व में आ गया है. इसका काम मेडिकल संस्थानों और प्रोफेशनलों को विनियमित करने के लिए नीतियां बनाना होगा. यह स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मानव संसाधनों और बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान देगा, यह निजी मेडिकल कॉलेजों और मानद विश्वविद्यालयों की अधिकतम सीटों की फीस तय करने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी करेगा.

 

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