मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय मानक भारत के लिए पर्याप्त नहीं: गृहमंत्री अमित शाह

गृहमंत्री शाह ने कहा कि कश्मीर में आतंकी हिंसा के चलते 40,000 से ज्यादा परिवारों ने अपने लोग खोए, क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं था.

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद मानवाधिकारों के हवाले से केंद्र सरकार पर हो रहे हमलों का जवाब शनिवार को गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 26 वें स्थापना दिवस पर विपक्षी दलों को दिया. उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकी हिंसा के चलते बड़े पैमाने पर लोगों का मारा जाना क्या मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है.

गृहमंत्री शाह ने कहा कि कश्मीर में आतंकी हिंसा के चलते 40,000 से ज्यादा परिवारों ने अपने लोग खोए, क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं था.
नक्सलवाद के चलते हजारों परिवार उजड़ गए लोग मारे गए जिले विकास नहीं कर पाए, क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं था.

उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अपील करते हुए कहा मानवाधिकार एक्ट में सरकार ने उनकी सिफारिशों के आधार पर संशोधन किया है, लेकिन अभी भी मानवाधिकारों को व्यापक बनाने की जरूरत है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के मुताबिक भारत में मानवाधिकार का संरक्षण नहीं किया जा सकता. अंतर्राष्ट्रीय मानक भारत के लिए पर्याप्त नहीं है इससे ऊपर उठकर दायरे को बढ़ाकर देश में मानवाधिकार को सुरक्षित करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि एक भी व्यक्ति गैर न्यायिक और पुलिस अभिरक्षा में नहीं मरना चाहिए. यह पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी है, लेकिन यह जरूरी है कि मानवाधिकारों को और व्यापक बनाया जाए.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार ने अपनी नीतियों से देश के 70 करोड़ से ज्यादा लोगों के मानवाधिकार की रक्षा करने का सबसे बड़ा प्रयास किया है, जो आजादी के बाद से मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे. सरकार ने उन्हें घर, धुएं से आजादी, स्वास्थ्य सुरक्षा समेत तमाम योजनाओं के जरिए वंचित और गरीब लोगों के मानवाधिकार की रक्षा की है.

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