फहीमा शिरीन, फोन के इस्‍तेमाल से रोका तो हॉस्‍टल छोड़ दिया, केरल हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के पीछे है ये लड़की
फहीमा शिरीन, फोन के इस्‍तेमाल से रोका तो हॉस्‍टल छोड़ दिया, केरल हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के पीछे है ये लड़की

फोन के इस्‍तेमाल से रोका तो हॉस्‍टल छोड़ दिया, केरल हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के पीछे है ये लड़की

इंग्लिश लिटरेचर की स्‍टूडेंट फहीमा शिरीन इकलौती ऐसी लड़की थीं जिन्‍होंने हॉस्‍टल अधिकारियों के पास फोन जमा करने के बजाय, हॉस्‍टल छोड़ना बेहतर समझा.
फहीमा शिरीन, फोन के इस्‍तेमाल से रोका तो हॉस्‍टल छोड़ दिया, केरल हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के पीछे है ये लड़की

केरल हाई कोर्ट ने 19 सितंबर को पहले एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अदालत ने इंटरनेट एक्‍सेस को मूल अधिकार बताया है. सिंगल जज वाली बेंच ने यह व्‍यवस्‍था 18 साल की एक लड़की की याचिका पर दी. इस लड़की का नाम है फहीमा शिरीन. वह कोझिकोड़ के श्री नारायण कॉलेज में पढ़ती हैं.

फहीमा जिस हॉस्‍टल में रहती थीं, वहां पर शाम 6 बजे से 10 बजे के बीच इंटरनेट एक्‍सेस के लिए मोबाइल फोन के इस्‍तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. फहीमा ने इसपर सवाल उठाया. वह इकलौती ऐसी लड़की थीं जिन्‍होंने हॉस्‍टल अधिकारियों के पास फोन जमा करने के बजाय, हॉस्‍टल छोड़ना बेहतर समझा.

शिरीन ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा, “जब जून में नई पाबंदी लगाई गई तो हॉस्‍टल की सारी लड़कियों ने कहा कि वे इसको फॉलो करेंगी. मैं मोबाइल फोन इस्‍तेमाल करने का अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं थी. मेरे पास हॉस्‍टल छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था.”

15 जुलाई को हॉस्‍टल छोड़ने के बाद, शिरीन अपने कॉलेज जाने के लिए रोज 150 किलोमीटर का सफर तय करती रहीं. उन्‍होंने कहा, “इस पाबंदी से लड़ने का फैसला मेरे पूरे परिवार का था. इंग्लिश लिटरेचर की स्‍टूडेंट होने के नाते, वेब से बहुत सारी डिटेल्‍स लेनी पड़ती हैं.” फहीमा उन्‍होंने यह भी कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी की सदस्‍य नहीं हैं.

पिछले साल कॉलेज ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक मोबाइल के इस्‍तेमाल पर बैन लगाया था. इस सेशन में वह बैन हटा लिया गया, मगर कुछ पेरेंट्स की डिमांड पर बैन का टाइम शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक कर दिया गया.

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