INX Media: ED मामले में पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर 13 नवंबर को फैसला सुनाएगा दिल्ली हाईकोर्ट

तीन गवाहों ने बताया कि चिदंबरम के परिजनों ने उनपर दवाब बनाकर ED के सामने पेश न होने के लिए कहा और जांच में सहयोग करने से मना किया.
inx media case delhi hc reserves order on chidambarams bail plea, INX Media: ED मामले में पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर 13 नवंबर को फैसला सुनाएगा दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने INX मीडिया के ED मामले में पी चिदंबरम जमानत याचिका पर आज सुनवाई पूरी की. कोर्ट ने पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है. कोर्ट बुधवार यानि 13 नवंबर को ED द्वारा सील्ड कवर लिफाफे में दिए दस्तावेजों को देखने के बाद फैसला तय करेगा. जरूरत पड़ने पर कोर्ट 13 नवंबर को पी चिदंबरम के वकील से जवाब मांग सकता है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ED की तरफ से पेश हो रहे हैं. इस दौरान दोनों पक्षों और जज के बीच हुई बातचीत का हिस्सा कुछ इस तरह है…

जज- 24 अक्टूबर से लेकर 31 अक्टूबर 2019 के बीच जब पी चिदंबरम ED कस्टडी में थे तो क्या किया आपने?

तुषार मेहता- हमने इस दौरान क‌ई लोगों को समन जारी किए लेकिन कुछ नहीं आए.

जज- फिर आपने क्या किया?

तुषार मेहता- ED ने फिर से समन भेजा.

जज- हमने ये सवाल इसलिए किया क्योंकि आपने पहले जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि वो जांच, सबूत और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं.

तुषार मेहता- तीन गवाहों को प्रभावित किया गया, हमने इसलिए जमानत का विरोध किया.

तुषार मेहता- CBI और ED को जांच के दौरान जो चीजें मिली वो अलग-अलग हैं, ED का केस और अपराध अलग है और CBI का अलग.

जज- CBI और ED दोनों में आरोपी एक ही है?

अभिषेक मनु सिंघवी- दोनों मामलों में आरोपी एक ही है.

तुषार मेहता- ये (सिंघवी) आपको गुमराह कर रहे हैं.

जज- मैं गुमराह नहीं हो रहा.

तुषार मेहता- माफ करना, मेरा मतलब ये है कि आपको गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, दोनों एजेंसियों की जांच और अपराध अलग है. प्री अरेस्ट बेल का मामला था इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने सील्ड लिफाफे को कंसीडर नहीं किया.

जज- CBI मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि भागने और सबूत नष्ट करने का रिस्क नहीं है, आरोपी वही है.

तुषार मेहता- हमें यहां ट्रिप्पल टेस्ट देखना होगा, अपराध की ग्रेविटी को देखना होगा, गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है, CBI और ED के सबूत अलग-अलग हैं.

तुषार मेहता- मनी लांड्रिंग का पैसा आरोपी कभी सीधा या अपने नाम पर नहीं लेता, इस मामले में भी अलग-अलग कंपनियों का इस्तेमाल करके बिना कोई सर्विस दिए पैसा लिया, पैसा कंपनियों से कंपनी और फिर याचिकाकर्ता की पोती के नाम ट्रांसफर हुआ.

कार्ति चिदंबरम की कंपनी से लेन-देन को लेकर ई मेल्स किए गए और आए‌. तीन गवाहों ने बताया कि चिदंबरम के परिजनों ने उनपर दवाब बनाकर ED के सामने पेश न होने के लिए कहा और जांच में सहयोग करने से मना किया.

ये CBI के मामले से अलग गवाह हैं, कोर्ट की संतुष्टि के लिए हम सील्ड लिफाफे में दस्तावेज देंगे. 16 देश में 12 संपत्तियां और 15 बैंक एकाउंट हैं जिनमें याचिकाकर्ता ( चिदंबरम ) की बेनामी संपत्तियां हैं.

ये CBI के मामले से अलग है, इसकी गंभीरता CBI के अपराध से अलग है, ये आर्थिक अपराध है, आरोपी और सह आरोपियों के बीच ई-मेल हुए, बेनामी संपत्तियां का संबंध आरोपी के परिवार से मिलते हैं. ‌

तुषार मेहता- सील्ड कवर लिफाफे में हमने बताया है कि कैसे पब्लिक ऑफिस का इस्तेमाल करके भ्रष्टाचार किया गया, मनी लांड्रिंग के लिए सेल कंपनियों का इस्तेमाल किया. देश और देश के बाहर सेल कंपनियां बनाई गई. आरोपियों के नुमाइंदों के तौर पर दूसरे आरोपी लेन-देन करते थे.

बिना रियल बिजनेस के विदेश में कंपनियों को पैसा मिलता था. करोड़ों रूपए लिए गए और बिना व्यापार के कार्ति चिदंबरम की कंपनी को ट्रांसफर हुए, हमने पता किया है कि कैसे और किसने बेनामी संपत्तियां विदेश में खरीदी.

तुषार मेहता- सेल कंपनियों के स्वामित्व को छिपाने के लिए अलग-अलग लोगों का इस्तेमाल किया गया. जहां तक भागने की बात है बिल्कुल रिस्क है, गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश हुई इसका भी डर है.

जज- 14 दिन की हिरासत में आपने किया?

तुषार मेहता- हमें 17 गवाहों के बयानों से पी चिंदबरम का आमना-सामना करवाया.

जज- कुल कितने लोगों के बयान दर्ज हुआ.

तुषार मेहता- तकरीबन 150 लोगों के बयान दर्ज हुआ, जांच अभी भी जारी है.

सुप्रीम कोर्ट ने CBI के मामले में जमानत देते हुए कहा था कि गवाहों को प्रभावित करने जैसा कुछ नहीं था.

कपिल सिब्बल- आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अंतिम पैरा देखिए, ED का जवाब देखिए ED ने अपने जवाब में कहीं नहीं कहा था कि पी चिदंबरम गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन गिरफ्तार होने के बाद जब वो अधिकारियों की देखरेख में हैं तो कैसे प्रभावित कर सकते हैं. उन्हें कैसे पता चलेगा कि ED किस गवाह को बुलाने जा रही है जबकि हिरासत में उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है, सिर्फ परिवार के लोग और वकील ही मिल पाते हैं. कार्ति चिदंबरम भी बेल पर हैं.

तुषार मेहता- कार्ति चिदंबरम ने मनी लांड्रिंग एक्ट के कुछ प्राविधानों को चुनौती दी थी जिसपर डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी से राहत दे दी थी, हमने उसे वापस लेने की याचिका दी थी जोकि अभी तक हाईकोर्ट में पेंडिंग है.

सिब्बल- जब मैं (चिदंबरम) CBI और ED की हिरासत में था तो गवाहों से आमना-सामना क्यों नहीं करवाया गया, ED की तीसरी रिमांड एप्लिकेशन को खारिज़ करते हुए कोर्ट ने भी कहा था. 2013 में कंपनी में पैसा आया तो वो 2006/7 से संबंधित कैसे हुआ?

सिंघवी- तीन लोग इस मामले में गिरफ्तार हुए लेकिन सिर्फ पी चिदंबरम ही जेल में हैं. 2016/17 में रेड हुई. 2015 से शुरू हुई. एडवांटेज कंपनी का पी चिदंबरम से क्या लेना-देना, जबकि एडवांटेज का तो कार्ति चिदंबरम से भी कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ वो करीबी की कंपनी जरुर है, कार्ति चिदंबरम की कंपनी का नाम चेस मैनेजमेंट है, लेकिन ED एडवांटेज कंपनी को कार्ति और कार्ति को पी चिदंबरम मानकर चल रही है. वो कस्टडी में किसी को कैसे प्रभावित कर सकते हैं.

जज- आप मुझे ED द्वारा सील्ड कवर लिफाफे में दिए गए दस्तावेजों को देखने दीजिए, मैं कोशिश करूंगा कि आपको बिना गोपनीयता भंग किए बता सकूं की आरोपी के खिलाफ क्या तथ्य हैं, तो आप जवाब दे देना.

तुषार मेहता ने विरोध करते हुए कहा कि सील्ड कवर लिफाफे में दिए दस्तावेजों की जानकारी आरोपी पक्ष के साथ सांझा नहीं किया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट भी यही कहता है, लेकिन अगर कोर्ट को लगता है कि इस से हमारी जांच प्रभावित नहीं होगी तो आप अपने विवेक अनुसार देख लिजिए, ये मामला बेहद संवेदनशील स्टेज पर है.

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