INX मीडिया केस: CBI ने सीलबंद लिफाफे में सौंपे दस्‍तावेज, 24 अक्‍टूबर को पेश किए जाएंगे चिदंबरम

CBI ने INX मीडिया मामले में कुल 14 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें से 4 प्राइवेट कंपनी है, 7 पब्लिक सर्वेंट है और 3 प्राइवेट पर्सन हैं.

INX मीडिया मामले में CBI की चार्जशीट का राउज एवेन्‍यू की स्‍पेशल कोर्ट ने संज्ञान लिया है. सोमवार को इस मामले में सुनवाई शुरू हुई. CBI की चार्जशीट के मुताबिक आरोपियों पर IPC की धारा 120 B, 420, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया गया है. भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत धारा 9, 13 (2) और 13 (1) D के चार्ज भी लगाए गए हैं.

CBI ने रॉउज एवेन्‍यू कोर्ट से कहा कि मामले में कुल 14 आरोपी है. इनमें से 4 प्राइवेट कंपनी है. 7 पब्लिक सर्वेंट है और 3 प्राइवेट पर्सन हैं. सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि मामले में चार्जशीट तो दायर कर दी है लेकिन मामले में जांच जारी है. संभव है कि INX केस में सीबीआई बाद में सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर करे.

फेमा का उल्लंघन है इसलिए मामले में IPC की धारा 420 लगाई गई है. INX मीडिया में विदेशी निवेश आने के बाद बिना इजाजत के पैसे को INX न्यूज़ को ट्रांसफर कर दिया गया है. लिहाजा, यहां भी उल्लंघन है.

लंच के बाद सुनवाई चैंबर के भीतर हुई. दरअसल, CBI ने सील बंद लिफाफे में कोर्ट को कुछ दस्‍तावेज दिए. कोर्ट से कहा कि ‘ये अर्जेंट है. कृपया इसे देखें और इन-चैंबर सुनवाई करे.

पी चिदंबरम को इस मामले में 24 अक्टूबर को पेश किया जाएगा. उसी दिन उनकी न्‍यायिक हिरासत भी खत्‍म हो रही है.

INX मीडिया केस: ये हैं आरोपी

CBI ने मामले में चार्जशीट में पी चिदंबरम समेत 14 लोगों को आरोपी बनाया है, आरोपियों में पीटर मुखर्जी, कार्ति चिदंबरम, भास्कर, पी चिदंबरम, सिंधुश्री खुल्लर, अनूप पुजारी, प्रबोध सक्सेना, आर प्रसाद, INX मीडिया, ASCP और शतरंज प्रबंधन का नाम है. चार्जशीट में वित्त मंत्रालय के चार पूर्व अफसरों का भी नाम है.

क्या था INX मामला?

सीबीआई ने 15 मई 2017 को केस दर्ज किया. जांच इस बात की करनी थी कि INX मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने कैसे 403 करोड़ रुपए रिसीव किए जबकि अप्रूव्‍ड अमाउंट 4 करोड़ 62 लाख रुपये था. फेमा का उलंघन करते हुए 40.91 करोड़ अपनी सिस्टर कंपनी से रिसीव किए. जांच के दौरान पता चला कि इसके डायरेक्टर्स- इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी ने आपराधिक साजिश तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम डायरेक्टर चैस मैनेजमेंट और तत्कालीन सरकारी अधिकारी जो FIPB यूनिट में तैनात थे. जिन्होंने मिलकर गलत तरीके से फायदा उठाया. कुल पेनल्टी कुल अमाउंट की तीन गुना थी.

आगे जांच में पता चला कि कार्ति चिदंबरम ने एडवांटेज स्ट्रेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी फ्लोट की. इसके जरिये कंसल्‍टेंसी के तौर पर फीस के तौर पर पेमेंट ली. बिना कोई सर्विस दिए ASCPL के एकाउंट में 9.96 लाख रुपये भेजे गए. बाद में इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बन गयी जिसने पी चिदंबरम और उसके बेटे कार्ति चिदंबरम के रोल के बारे में बताया.

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