INX Media Case: कोर्ट में सिब्बल ने कहा, जांच से दिक्कत नहीं लेकिन चिदंबरम को जेल में क्यों रखा जा रहा?

'अगर हर आरोपी कोर्ट में आकर कहे कि मैं सरेंडर करना चाहता हूं और फलां तारीख से मेरी कस्टडी शुरू की जाए, ऐसे तो एजेंसियों का कोई काम ही नहीं रह जाएगा.'

INX मीडिया मामले में पी चिदंबरम की ED के सामने सरेंडर करने के मामले में दिल्ली की रॉउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है. पी चिदंबरम की तरफ से कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे हैं. ED ने चिदंबरम की याचिका पर रिप्लाई फाइल किया है.

ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि, आरोपी यह नहीं तय कर सकते हैं कि उन्हें ED हिरासत में कब लेगी?

फिलहाल इस मामले में आरोपी जुडिशल कस्टडी में है. अभी यह बताना मुश्किल है कि हम उनको कब कस्टडी में लेकर पूछताछ करेंगे. हमें जब ED कस्टडी में लेना होगा तो हम कोर्ट में अर्जी डालेंगे. ED की तरफ से तुषार मेहता इस मामले में अन्य केसों का हवाला भी दे रहे हैं.

कपिल सिब्बल- ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है, लेकिन अब ED का मन बदल गया, क्योंकि पी चिदंबरम न्यायिक हिरासत में हैं, ED सिर्फ चिदंबरम को परेशान करना चाहती है. ये सब उन्हें जेल में ज्यादा दिन रखने के लिए किया जा रहा है, पहले गिरफ्तार किया गया और अब जेल में रखने के लिए मामले को लंबा खींचा जा रहा है. हम जांच में कोई व्यवधान नहीं डालना चाहते, चिदंबरम तो चाहते हैं कि आप उनसे पूछताछ करिए, 5 सितंबर को भी हमने यही कहा था.

कपिल ने बताया कि इस केस को लेकर चिदंबरम का कहना है कि, उन्हें जांच से कोई दिक्कत नहीं है वो हमेशा सहयोग के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें जेल में क्यों रखा जा रहा है? 2017 का केस है और 2019 में गिरफ्तारी होती है.

चिदंबरम खुद 5 सितंबर को कोर्ट में पेश थे और उन्होंने खुद कहा था कि ईडी कस्टडी में लेकर पूछताछ करे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. 21 अगस्त को जब चिदंबरम को गिरफ्तार करने ED पहुंची तब से अब तक क्या बदल गया.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता- अगर हर आरोपी कोर्ट में आकर कहे कि मैं सरेंडर करना चाहता हूं और फलां तारीख से मेरी कस्टडी शुरू की जाए, ऐसे तो एजेंसियों का कोई काम ही नहीं रह जाएगा.

कुछ नहीं बदला है, हमने अपने जवाब में भी कहा है कि 21 अगस्त से पहले जो बातें थीं वो अभी भी है, हमने कहा कि हम उस डेट को गिरफ्तारी करना चाहते हैं, कर भी सकते थे. हम उन 15 दिनों जांच के लिए बेहतर इस्तेमाल करेंगे, कुछ अन्य आरोपियों से भी कंफर्ट करवाएंगे.

मेहता- जिस निरंजन सिंह के जजमेंट का सिब्बल ने हवाला दिया वो कंप्लेंट केस था FIR नहीं इसलिए उसे जमानत मिली.

सिब्बल- ये भी कंप्लेंट केस है, सुप्रीम कोर्ट में बिना वारंट के ईडी ने हिरासत की बात स्वीकार कर ली थी, ये पूरा मामला मालाफाइड है.

बता दें कि कोर्ट ने मामले पर ऑर्डर रिजर्व किया है, कल दो बजे फैसला सुनाया जाएगा.

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