आसाराम बापू पर लिखी गई किताब से रोक हटी, दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला

आसाराम (Asaram) कभी रोता था, कभी दीवार ​पर सिर मारता था, कभी गिड़गिड़ाता था. आसाराम ने खुद को नपुंसक साबित करके बचने की कोशिश की, उसका पोटेंसी टेस्ट कराने की बात आई तो कुछ अधिकारी विरोध करने लगे, आखिरकार टेस्ट हुआ और आसाराम उसमें नपुंसक साबित नहीं हुए.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 8:00 am, Thu, 24 September 20

राजस्थान (Rajasthan) की राजधानी जयपुर (Jaipur) में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात आईपीएस (IPS) अजय पाल लांबा (Ajay Pal Lamba) की किताब (Book) ‘गनिंग ऑफ गॉडमैन’ को आखिरकार दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) से लॉन्चिंग की मंजूरी मिल गई है. बीते 5 अगस्त को दिल्ली की एक नीचली अदालत ने लॉन्चिंग से पहले रोक लगा दी थी. इस पर किताब प्रकाशन हार्पर कॉलिंस की ओर से अपील दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. यहां जस्टिस नजीम वाजीरी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कुछ शर्तों के साथ किताब प्रकाशन की इजाजत दे दी.

दरअसल, जोधपुर के एक आश्रम में नाबलिग से दुष्कर्म के मामले और कथिक संत आसराम जेल में सजा काट रहे हैं. अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को एक नाबलिग से बलात्कार को दोषी पाया था. आसाराम को आईपीसी की धराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

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कोर्ट ने दिया प्रकाशक को निर्देश

कोर्ट ने कहा कि प्रकाशन के दौरान प्रकाशक हार्पर कॉलिंस को पाठकों को ये बताना होगा ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता की अपील अभी राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है. ताकि, किताब पढ़ने वाले पाठकों को किसी भी तरह का कोई भ्रम न रहे और उन्हें इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी किताब के माध्यम से मिल सके.

किताब की खास बातें

आसाराम कभी रोता था, कभी दीवार ​पर सिर मारता था, कभी गिड़गिड़ाता था. आसाराम ने खुद को नपुंसक साबित करके बचने की कोशिश की, उसका पोटेंसी टेस्ट कराने की बात आई तो कुछ अधिकारी विरोध करने लगे, आखिरकार टेस्ट हुआ और आसाराम उसमें नपुंसक साबित नहीं हुए. कुछ बड़े लोगों का भी दबाव था लेकिन राजनैतिक दबाव नहीं था.

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