अयोध्‍या केस: रिव्‍यू पिटीशन का फैसला लेने वाले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर बरसे इकबाल इंसारी

बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा, पक्षकार बहुत ज्‍यादा हैं, कौन क्‍या करता है, इसकी मेरी कोई जिम्‍मेदारी नहीं. मैं किसी को मना करने पहले भी नहीं जाता रहा, आज भी नहीं जाऊंगा.
Iqbal Ansari Distances Himself from babri masjid, अयोध्‍या केस: रिव्‍यू पिटीशन का फैसला लेने वाले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर बरसे इकबाल इंसारी

लखनऊ: अयोध्‍या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्‍यू पिटीशन डालने के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के ऐलान के बाद इकबाल अंसारी का बयान आया है. टीवी9भारतवर्ष के साथ बातचीत में इकबाल अंसारी ने उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्‍वीकार कर लिया है.

इकबाल अंसारी ने कहा, ‘देखिए ऐसा है, ये मुकदमा जो है, लोअर कोर्ट, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट…70 बीत गया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला कर दिया, कोर्ट का हमने सम्‍मान कर लिया. पक्षकार बहुत ज्‍यादा हैं, कौन क्‍या करता है, इसकी मेरी कोई जिम्‍मेदारी नहीं. मैं किसी को मना करने पहले भी नहीं जाता रहा, आज भी नहीं जाऊंगा.’

इकबाल अंसारी ने आगे कहा, ‘जो काम जो कर रहा है, उसकी जिम्‍मेदारी है. हमारी जिम्‍मेदारी इतनी थी कि कोर्ट ने जो फैसला किया है, हमने पूरी दुनिया को अच्‍छा संदेश दिया, कि कोर्ट का फैसला मान लो, ये झगड़ा है, जो कुछ भी था, कोर्ट ने जो भी कुछ किया, उसका सब लोग सम्‍मान कर लीजिए, क्‍योंकि 70 साल बीत गए हैं. अब इसको आगे नहीं बढ़ाना है, अब हमारा काम खत्‍म हो गया है.’

इससे पहले रविवार को लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की बैठक हुई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्‍यू पिटीशन दाखिल करने की बात कही गई. इस बैठक में मौलाना महमूद मदनी, अरशद मदनी, खालिद रशीद फरंगी महली, जफरयाब जिलानी और राबे हसन नदवी समेत मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी सदस्‍य शामिल हुए.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दावा किया कि अयोध्‍या मामले में बाबरी के तीन पक्षकार- मौलाना महफूज़ रहमान, मोहम्मद उमर और मिस्बाहुद्दीन पुनर्विचार याचिका के लिए सहमति दे चुके हैं.

क्‍या तर्क दे रहा है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की घोषणा करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि हमें बाबरी मस्जिद के बदले 5 एकड़ की जमीन मंजूर नहीं है. लखनऊ में पर्सनल लॉ बोर्ड ने मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाए.

बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग के बाद बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई विरोधाभास हैं.

शीर्ष अदालत में मुस्लिम पक्ष के वकील रहे जफरयाब जिलानी की मौजूदगी में बोर्ड के सदस्य एसक्यूआर इलियासी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मस्जिद का निर्माण कराया. 1857 से 1949 तक बाबरी मस्जिद की तीन गुंबदों वाली इमारत और अंदरूनी हिस्‍से पर मुस्लिमों का कब्‍जा भी अदालत में साबित हो गया, इसके बाद भी जमीन मंदिर के लिए जमीन क्यों दी गई?

एसक्यूआर इलियासी ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद में आखिरी नमाज 16 दिसंबर, 1949 को पढ़ी गई थी यानी वह मस्जिद के रूप में थी. फिर भी इस पर मंदिर के दावे के क्यों स्वीकार किया गया? सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 22-23 दिसंबर, 1949 की रात को चोरी से या फिर जबरदस्ती मूर्तियां रखी गई थीं. इसके बाद इन मूर्तियों को देवता नहीं माना जा सकता, जिनकी प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई थी.

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