चंद्रयान-2: अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है विक्रम, उम्मीद अब भी कायम

चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर में ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है कि वो गिरने के बाद भी खड़ा हो सकता है.

शनिवार को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करते समय सतह से 2.1 किलोमीटर ऊंचाई पर लैंडर का ISRO से संपर्क टूट गया था. इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का पता लगा लिया है. चांद की परिक्रमा कर रहे चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की तस्वीरें भेजी हैं.

इसरो की उम्मीद अब भी कायम है. विक्रम लैंडर चांद की जमीन पर अपने तय स्थान से करीब 500 मीटर दूर गिरा पड़ा है. अगर उससे कम्यूनिकेट हो सका तो वो अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है. चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर में ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है कि वो गिरने के बाद भी खड़ा हो सकता है. इसके लिए जरूरी है कम्युनिकेशन सिस्टम से से कनेक्ट होना जरूरी है ताकि लैंडर कमांड रिसीव कर सके.

हालांकि, इस काम के पूरे होने की उम्मीद 1 फीसदी ही है. विक्रम लैंडर में मौजूद ऑनबोर्ड कम्प्यूटर खुद ही कई काम करने में सक्षम है.

गिरने की वजह से विक्रम लैंडर का एंटीना दब गया है, जिसके चलते कम्युनिकेट कर पाना और सिस्टम को कमांड भेजना मुमकिन नहीं हो पा रहा है. इसरो वैज्ञानिक फिलहाल इस कोशिश में हैं कि विक्रम लैंडर को किसी तरह से एंटीना के जरिए वापस अपने पैरों पर खड़े होने का कमांड दिया जा सके.

अपने पैरों पर कैसे खड़ा होगा विक्रम लैंडर

इसरो के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विक्रम लैंडर के नीचे पांच थ्रस्टर्स लगे हैं. इन्हीं के जरिए विक्रम को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी. वहीं विक्रम के चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगे हैं, जो अंतरिक्ष यात्रा के दौरान लैंडर को डायरेक्शन देने के लिए ऑन किया जाता था. ये थ्रस्टर्स अभी भी सेफ हैं.

लैंडर के जिस हिस्से में एंटीना दबा है, वहां पर भी थ्रस्टर्स लगे हैं. अगर दबे हुए एंटीना ने पृथ्वी पर मौजूद ग्राउंड स्टेशन से भेजे गए कमांड को सीधे या ऑर्बिटर के जरिए रिसीव कर लिया तो विक्रम थ्रस्टर्स ऑन किए जा सकते हैं. थ्रस्टर्स ऑन होते ही विक्रम एक तरफ से उठकर अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है. अगर ये हो पाया चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े सारे प्रयोग सफल हो पाएंगे जो इसरो के वैज्ञानिकों ने तय किए थे.

विक्रम को वापस अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए अब 11 दिन बचे हैं

इसरो चीफ सिवन ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि आने वाले 14 दिनों में हमें उम्मीद है कि हम लैंडर विक्रम को ढूंढ लेंगे. अब तीन दिन बीत चुके हैं. यानी अब 11 दिन बहुत अहम होंगे.

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर पूरी तरह ठीक है और वह करीब 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित अपनी कक्षा में चांद की परिक्रमा कर रहा है. वह साढ़े 7 साल तक ऐक्टिव रहेगा और धरती तक चांद की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें और अहम डेटा भेजता रहेगा. उस पर कैमरे समेत 8 उपकरण लगे हुए हैं जो अत्याधुनिक है.

ऑर्बिटर का कैमरा तो अबतक के मून मिशनों में इस्तेमाल हुए कैमरों में सबसे ज्यादा रेजॉलूशन वाला है. ऑर्बिटर लैंडर की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें ले सकता है. ऑर्बिटर द्वारा भेजे गए डेटा के विश्लेषण से किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. अगले 11 दिनों में लैंडर की स्थिति से लेकर उससे जुड़े सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे.

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