चंद्रयान-2: सिर्फ 335 मीटर से चूक गया ‘विक्रम’, पता चला क्‍यों फेल हुई सॉफ्ट-लैंडिंग

लैंडर 'विक्रम' को सतह 400 मीटर दूर रह जाने तक अपनी स्‍पीड बेहद कम कर लेनी चाहिए थी और लैंडिंग साइट के ऊपर मंडराने लगना चाहिए था.

ISRO ने शुरुआती जांच में लैंडर विक्रम के चांद पर सॉफ्ट-लैंडिंग में फेल होने की वजह पता लगा ली है. टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड सेंटर में बड़ी-बड़ी स्‍क्रीन्‍स पर एनालिसिस शुरू हो गया है. डेटा बतलाता है कि ‘विक्रम’ जब अपने सफर के आखिरी हिस्‍से में था तो ‘फाइन ब्रेकिंग फेज’ फेल हो गया. यह फेज चांद की सतह से ‘विक्रम’ के पांच किलोमीटर दूर रह जाने पर शुरू हुआ था.

ISRO ने अपने बयान में कहा, विक्रम की नॉर्मल परफॉर्मेंस 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक देखी गई, इसके बाद ग्राउंड स्‍टेशंस ने लैंडर का संपर्क टूट गया. द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मिशन कंट्रोल में लगी स्‍क्रीन्‍स दिखाती हैं कि लैंडर से संपर्क जब टूटा, जब वह चांद की सतह से सिर्फ 335 मीटर की दूरी पर था. स्‍क्रीन्‍स के मुताबिक, लैंडर को दर्शाता ग्रीन डॉट 2 किलोमीटर की ऊंचाई से मुड़ना शुरू हुआ और एक किलोमीटर से 500 मीटर के बीच रुका.

इस दौरान, मॉड्यूल की वर्टिकल वेलॉसिटी 59 मीटर/सेकेंड और हॉरिजॉन्‍टल वेलॉसिटी 48.1 मीटर/सेकेंड थी. तब लैंडर अपने लैंडिंग प्‍वॉइंट से करीब 1.09 किलोमीटर दूर था. प्‍लान के मुताबिक, ‘विक्रम’ को 400 मीटर दूर रह जाने तक अपनी स्‍पीड बेहद कम कर लेनी चाहिए थी और लैंडिंग साइट के ऊपर मंडराने लगना चाहिए था.

लैंडर की स्‍पीड को 1680 मीटर/सेकेंड से जीरो मीटर/सेकेंड तक लाने के लिए उसमें चार 800 N लिक्विड फ्यूल इंजन लगाए गए थे. हर इंजन में 8 थर्स्‍टर्स थे. विक्रम का नेविगेशन सिस्‍टम अपने आप फैसले कर रहा था.

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