दांत में खराबी ने करा दिया रिजेक्‍ट, पढ़ें ISRO ने गगनयान के लिए कैसे चुने 12 पायलट

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए फिजिकल, मेंटल और मेडिकल कंडीशंस को परखा गया. रशियन एक्‍सपर्ट्स की टीम ने डेंटल प्रॉब्‍लम्‍स वाले कैंडिडेट्स को बाहर कर दिया.

ISRO Gaganyaan Mission, दांत में खराबी ने करा दिया रिजेक्‍ट, पढ़ें ISRO ने गगनयान के लिए कैसे चुने 12 पायलट

ISRO के गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) की खातिर 12 टेस्‍ट पायलट्स चुने गए हैं. एयरफोर्स के इंस्‍टीट्यूट ऑफ एयरोस्‍पेस मशीन (IAM) में तीन महीने तक 60 पायलट्स की प्रोफाइल्‍स खंगाली गईं. एक्‍सपर्ट्स ने पाया कि अधिकतर पायलट्स के दांत में परेशानी थी. एक एस्‍ट्रोनॉट के दांत खराब होना ठीक नहीं होता.

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए फिजिकल, मेंटल और मेडिकल कंडीशंस को परखा गया. जुलाई और अगस्‍त में पहले लेवल की स्‍क्रीनिंग हुई. अधिकतर कैंडिडेंट्स डेंटल प्रॉब्‍लम्‍स के चलते दौड़ से बाहर हो गए.

IAM ने IAF की ओर से भेजे गए 24 टेस्‍ट पायलट्स में से 16 को चुना था. हालांकि रशियन एक्‍सपर्ट्स की टीम ने डेंटल प्रॉब्‍लम्‍स वाले कैंडिडेट्स को बाहर कर दिया. एयर कमोडोर अनुपम अग्रवाल ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा, “वे दांतों को लेकर सजग थे. हमको जो चीजें ठीक लगी थीं, उन्‍हें वैसी नहीं लगीं. शायद ऐसा इसलिए हो क्‍योंकि उन्‍हें दांत के दर्द की वजह से मिशन रोकना पड़ा था. एक फ्लाइट सर्जन जिसके पास एयरोस्‍पेस मेडिसिन में पीएचडी हो और एक कॉस्‍मोनॉट जो 562 दिन अंतरिक्ष में रहा हो, हमने बेहतर जानते हैं.”

एस्‍ट्रोनॉट्स के लिए क्‍यों जरूरी हैं दांतों की सेहत?

एस्‍ट्रोनॉट्स के दांत सही होने चाहिए क्‍योंकि स्‍पेस फ्लाइट के दौरान एक्‍सीलरेशन और वाइब्रेशन बेहद मजबूत होता है. अगर दातों की फिलिंग में जरा सी भी गड़बड़ हो तो वे निकल सकती हैं. अगर कैविटीज हैं तो एटमॉस्‍फेयर प्रेशर की वजह से दांत में दर्द हो सकता है. 1978 में रूस के Salyut 6 मिशन के कमांडर यूरी रोमानेनको को दो हफ्ते तक दांत का दर्द झेलना पड़ा था.

सिलेक्‍ट किए गए पायलट्स को 45 दिन तक रूस के यूरी गागरिन कॉस्‍मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में एस्‍ट्रोनॉट्स की जेनेरिक ट्रेनिंग दी गई. इनमें से 7 ने ट्रेनिंग पूरी कर ली है. ट्रेनिंग और टेस्‍ट्स पूरे कर यह ग्रुप 2022 तक भारत लौटेगा. 2022 तक गगनयान का लॉन्‍च प्रस्‍तावित है.

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