ISRO Launches CARTOSAT-3, CARTOSAT-3 और 13 नैनो सैटेलाइट्स का लॉन्‍च सफल, ISRO ने बनाया 310 विदेशी उपग्रह छोड़ने का रिकॉर्ड
ISRO Launches CARTOSAT-3, CARTOSAT-3 और 13 नैनो सैटेलाइट्स का लॉन्‍च सफल, ISRO ने बनाया 310 विदेशी उपग्रह छोड़ने का रिकॉर्ड

CARTOSAT-3 और 13 नैनो सैटेलाइट्स का लॉन्‍च सफल, ISRO ने बनाया 310 विदेशी उपग्रह छोड़ने का रिकॉर्ड

CARTOSAT-3 तीसरी पीढ़ी का एडवांस्‍ड सैटेलाइट है, जिसमें हाई रिजोल्यूशन इमेजिंग कैपेबिलिटी है.
ISRO Launches CARTOSAT-3, CARTOSAT-3 और 13 नैनो सैटेलाइट्स का लॉन्‍च सफल, ISRO ने बनाया 310 विदेशी उपग्रह छोड़ने का रिकॉर्ड

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (ISRO) ने आज एक नया मुकाम हासिल किया. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) रॉकेट ने 14 उपग्रहों को सिर्फ 27 मिनट में अंतरिक्ष में पहुंचा दिया. CARTOSAT-3 अब इसरो को महत्‍वपूर्ण डेटा मुहैया कराएगा. उसके साथ 13 अमेरिकी नैनो सैटेलाइट्स भी हैं. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्‍पेस सेंटर से सुबह 9.28 बजे PSLV-C47 लॉन्‍च कर दिया गया. यह इस स्‍पेस सेंटर का 74वां स्‍पेस लॉन्‍च है.

ISRO ने कैसे किया लॉन्‍च?

लॉन्‍च के बाद, PSLV रॉकेट ने पहले 17 मिनट में CARTOSAT-3 को कक्षा में स्थापित क‍िया. उसे 97.5 डिग्री के झुकाव पर 509 किमी की कक्षा में प्लेस किया गया. एक मिनट बाद 13 अमेरिकी नैनो सैटेलाइट्स को एक-एक करके ऑर्बिट में रखा गया. PSLV रॉकेट टेकऑफ करने के 26 मिनट और 50 सेकेंड बाद आखिरी रॉकेट को भी सफलतापूर्वक प्‍लेस कर दिया गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO को सफल लॉन्‍च पर बधाई दी है. प्रधानमंत्री ने लिखा, “ISRO ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया है.”

इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहा, “यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि PSLV-C47 ने CARTOSAT-3 और 13 अमेरिकी उपग्रहों को उनकी कक्षाओं में स्थापित कर दिया है. कार्टोसैट-3 इसरो द्वारा अब तक बनाया गया भारत का उच्च रिजोल्यूशन का सिविलियन यान है.”

CARTOSAT-3 क्‍यों है खास?

भारत का CARTOSAT-3 1,625 किलोग्राम वजनी है. CARTOSAT-3 तीसरी पीढ़ी का एडवांस्‍ड सैटेलाइट है, जिसमें हाई रिजोल्यूशन इमेजिंग कैपेबिलिटी है. CARTOSAT-3 पांच साल तक काम करेगा. सैटेलाइट से शहरी नियोजन, ग्रामीण संसाधन और बुनियादी ढांचे के विकास, तटीय भूमि उपयोग और अन्य की मांगों की पूर्ति के लिए तस्वीरें ले सकेगा.

ISRO के मुताबिक, पेलोड्स में 0.25 मीटर ग्राउंड रिजोल्यूशन तक की तस्वीर पैंक्रोमेटिक में या 16 किलोमीटर के चार बैंड मल्टीस्पैक्ट्रल मोड्स में ग्राउंड सैंपल डिस्टेंस (GSD) में लेने की क्षमता है. CARTOSAT-3 में कई नई तकनीकों का उपयोग किया गया है. इनमें अधिक फुर्तीले स्ट्रक्चरल प्लेटफॉर्म, पेलोड प्लेटफॉर्म, डेटा हैंडलिंग और ट्रांसमिशन सिस्टम की उच्च दर, उन्नत ऑनबोर्ड कम्प्यूटर और नई पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्यूअल गिम्बल एंटीना और अन्य हैं.

अब तक CARTOSAT-3 जैसा ताकतवर सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया. अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट धरती से 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ही ले सकता है. वहीं, इसी कंपनी का वर्ल्डव्यू-2 सैटेलाइट 18.11 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें लेने में सक्षम है.

ISRO अधिकारियों ने कहा कि सैटेलाइट्स विभिन्न एजेंसियों के लिए जरूरी तस्वीरें भेजेंगे. तस्वीर के उपयोग का निर्णय एजेंसी लेगी. उपग्रह द्वारा ली जाने वाली तस्वीरों का उपयोग निगरानी के उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है.

अमेरिकी सैटेलाइट्स क्‍यों?

अमेरिका के 13 नैनो सैटेलाइट्स न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ बने सिस्‍टम का हिस्‍सा हैं. NSIL कंपनी हाल ही में अंतरिक्ष विभाग के तहत बनाई गई है. अमेरिका इस सवारी के लिए NSIL को पेमेंट करेगा.

ISRO के मुताबिक, अमेरिकी नैनो सैटेलाइट्स में से 12 को FLOCK-4P का नाम दिया गया है. सभी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट हैं. वहीं 13वां सैटेलाइट एक कम्युनिकेशन टेस्ट बेड सैटेलाइट है, जिसका नाम MESHBED है.

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