Chandrayaan-2 ने चंद्रमा की कक्षा में पूरा किया 1 साल, ISRO ने कहा- अभी और 7 साल के लिए ईंधन बाकी

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया था और 20 अगस्त, 2019 को इसने चंद्रमा (lunar) के ऑर्बिट (Orbit) में प्रवेश किया था.

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  • Publish Date - 7:04 am, Fri, 21 August 20

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO)ने जानकारी दी कि भारत का दूसरा चंद्र अभियान (Lunar Mission) चंद्रयान -2 (Chandrayaan-2) गुरुवार को चंद्रमा के चारों ओर ऑर्बिट में एक वर्ष पूरा कर चुका है. वर्तमान में सभी उपकरण अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे चालू रखने के लिए पर्याप्त जहाज पर ईंधन है, जो कि सात साल तक चल सकता है.

22 जुलाई, 2019 को लॉन्च हुआ था चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया था और 20 अगस्त, 2019 को इसने चंद्रमा के ऑर्बिट में प्रवेश किया था. ISRO ने कहा कि सॉफ्ट-लैंडिंग का प्रयास (रोवर ले जाने वाले लैंडर का) सफल नहीं हुआ था. ऑर्बिटर, जो आठ साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट से लैस था, उसको सफलतापूर्वक चंद्र कक्षा में रखा गया था. ऑर्बिटर ने चंद्रमा के चारों ओर 4,400 से अधिक परिक्रमाएं पूरी कीं और सभी उपकरण वर्तमान में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.

स्पेस एजेंसी ने अपने बयान में यह भी बताया कि स्पेसक्राफ्ट हेल्दी था और सब-सिस्टम का प्रदर्शन सामान्य था. चंद्रयान-2 मिशन चंद्र सतह पर एक रोवर की सॉफ्ट लैंडिंग कराने का भारत का पहला प्रयास था. लैंडर विक्रम के चंद्रमा पर उतरने के आखिरी पलों में लैंडर का ग्राउंड स्टेशन से संपर्क टूट गया था. हालांकि बाद में पता चला था कि विक्रम ने पिछले साल सितंबर में चांद पर हार्ड लैंडिंग की थी.

ऑर्बिटर में हाई टेक्नीक वाले कैमरे लगे हैं, जिससे कि वह चांद के बाहरी वातावरण और उसकी सतह के बारे में जानकारी जुटा सके. ISRO ने कहा कि ऑर्बिटर के कच्चे डेटा को इंडियन स्पेस साइंस डेटा सेंटर (ISSDC) में इस एक साल के दौरान डाउनलोड किया गया है. प्राथमिक समीक्षाओं के बाद इस साल के अंत तक पब्लिक डेटा रिलीज किया जा सकता है.