चंद्रयान 2 पर निराश होने वाले पढ़ लें डॉ. कलाम की ये बात, मन में भर जाएगा नया विश्‍वास

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम के 1979 में SLV-3 सेटेलाइट के फेल होने के बाद कहे शब्द हर भारतीय को एक बार फिर से नई चेतना से भर देने के लिए काफी हैं.

चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर एक स्मूथ लैंडिंग करने और अपनी गति को कम करने में असमर्थ रहा, वैसे तो भारत लगभग इस मिशन में कामयाब ही रहा लेकिन चांद की सतह को न छू पाने का दर्द करोड़ों भारतीयों चेहरों को मायूस कर रहा है.

ऐसे में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम के 1979 में SLV-3 सेटेलाइट के फेल होने के बाद कहे शब्द हर भारतीय को एक बार फिर से नई चेतना से भर देने के लिए काफी हैं.

1979 की उस घटना का जिक्र

साल 2013 में एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने 1979 की उस घटना का जिक्र किया था, जिसमें भारत के पहला सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल (SLV-3) फेल हो गया था. कलाम उस मिशन के प्रमुख थे. उन्होंने साल 2013 की सभा में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अपनी हार का सामना किया.

‘मुझे एक निर्णय लेना था’

उन्होंने कहा, “साल 1979 था. मैं प्रोजेक्ट डायरेक्टर था. मेरा मिशन उपग्रह को कक्षा में रखने का था. हजारों लोगों ने लगभग 10 साल काम किया. मैं श्रीहरिकोटा पहुंच गया. उलटी गिनती चल रही थी.

टी माइनस 4 मिनट, टी माइनस 3 मिनट, टी माइनस 2 मिनट, टी माइनस 1 मिनट, टी माइनस 40 सेकंड और कंप्यूटर ने इसे होल्ड कर दिया. इसे लॉन्च नहीं किया गया. मैं मिशन निदेशक था, मुझे एक निर्णय लेना था.”

‘रॉकेट लॉन्च करने का फैसला किया’

कलाम ने इस सभा में बताया कि विशेषज्ञों ने उन्हें लॉन्च करने और आगे बढ़ने की सलाह दी क्योंकि वे अपनी कैल्कुलेशन को लेकर आश्वस्त थे. कलाम ने कंप्यूटर को बायपास करने और रॉकेट लॉन्च करने का फैसला किया.

उन्होंने कहा, “मैंने कंप्यूटर को बायपास किया और सिस्टम लॉन्च किया. उपग्रह लॉन्च होने से पहले चार चरण होते हैं. पहला चरण अच्छी तरह से बंद हो गया, और दूसरे चरण में, वह संतुलन खो बैठा और स्पिन होने लगा. फिर हमने उपग्रह को कक्षा में रखने के बजाय, उसे बंगाल की खाड़ी में डाल दिया.”

‘विफलता कैसे मैनेज करूं?’

कलाम ने कहा, “निर्णय उनको लेना था और उन्होंने ही कंप्यूटर की चेतावनी को ओवररूल करने का फैसला लिया. पहली बार मुझे असफलता का सामना करना पड़ा…और विफलता से कैसे निपटा जाए? मैं सफलता मैनज कर सकता हूं, लेकिन विफलता कैसे मैनेज करूं?”

ISRO प्रमुख ने कही थी ये बात

कलाम ने इसके बाद कहा कि कैसे ISRO प्रमुख सतीश धवन ने आलोचनाओं के डर के बावजूद उनके साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. कलाम ने बताया कि धवन ने कहा, “प्रिय दोस्तों, हम आज असफल रहे हैं. मैं अपने टेक्नोलॉजिस्ट, अपने वैज्ञानिकों, अपने कर्मचारियों का समर्थन करना चाहता हूं, ताकि अगले साल वे सफल हों.”

कलाम ने कहा, ”आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने सारा दोष अपने ऊपर ले लिया और उन्हें आश्वासन दिया कि अगले साल हम सफल होंगे क्योंकि उनकी टीम बहुत अच्छी थी.”

मालूम हो कि अगले साल, 18 जुलाई 1980 को, कलाम के नेतृत्व में उसी टीम ने सफलतापूर्वक रोहिणी आरएस-1 का सफल लॉन्च किया. इसके बाद कलाम ने कहा कि धवन ने उन्हें उस दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए कहा.

मैंने उस दिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक सीखा…

कलाम कहते हैं कि, “मैंने उस दिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक सीखा. जब विफलता हुई, तो संगठन के नेता ने उस विफलता का श्रेय लिया था. जब सफलता मिली, तो उन्होंने इसे अपनी टीम को दिया. सबसे अच्छा सबक जो मैंने सीखा है, वह किताब पढ़ने से मेरे पास नहीं आया. यह उस अनुभव से आया है.”

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