मानसून सत्र का दूसरा दिन : सदन में गूंजा ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ शब्द के इस्तेमाल से लेकर ‘मेंटल हेल्थ’ का मुद्दा

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) का मंगलवार को दूसरा दिन था. राज्यसभा में राजनीतिक दलों ने अलग-अलग मुद्दों जैसे, मराठा समुदाय के आरक्षण, 'सोशल डिस्टेंसिंग' (Social Distancing) शब्द के इस्तेमाल को उठाया.
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संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) सोमवार से शुरू हुआ. मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दूसरे दिन मराठा मुद्दे से लेकर ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ (Social Distancing) शब्द का इस्तेमाल करने और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे राज्यसभा में उठाए गए.

कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने शून्यकाल में मराठा समुदाय के आरक्षण पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए कोटा मुद्दा उठाया. संभाजी छत्रपति ने भी इसी विषय पर बात की.

न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस की खबर के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के सांतनु सेन ने सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि इससे कोविड मरीजों और उनके परिवारों को ‘अमानवीय स्थिति’ का सामना करना पड़ा है. उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सेन से सहमति जताई और कहा कि इस शब्द की जगह किसी और शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए.

द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) सांसद तिरुचि शिवा ने कोरोना काल में शिक्षा में डिजिटल डिवाइड के मुद्दे को उठाया, वहीं उनके पास बैठे तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सहमति जताई. शिवा ने दावा किया कि इसने एक वर्ग को दूसरे के मुकाबले ज्यादा फायदा पहुंचाया है.

सपा ने उठाया बेरोजगारी का मुद्दा

समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने नोएडा का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां कोरोना से मरने वालों की संख्या के मुकाबले आत्महत्या करने वालों की संख्या ज्यादा है. उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया कि महामारी के कारण नौकरी गंवाने वालों को 15,000 रुपए प्रति माह की सहायता दी जाए.

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने देश में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया. उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को अनिवार्य रूप से जीवन बीमा के दायरे में रखे जाने की मांग की.

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