विदेश मंत्री एस जयशंकर बोले- POK हमारा है, एक दिन वहां हमारी मौजूदगी होगी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि विदेशों में बसे भारतीयों को विदेश नीति के साथ जोड़ना इस सरकार की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण कदम रहा.

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार बनने के पहले दिन से ही विदेश मंत्रालय का काम शुरू हो गया था, जब बिम्सटेक संगठन के नेताओं को शपथ ग्रहण में आमंत्रित किया गया था.

पाकिस्‍तान के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि आज अगर मानवाधिकार ऑडिट हो जाए तो वो पाकिस्तान सबसे आखिर में रहेगा. पाकिस्तान के साथ दिक्कत ये है कि वो लोग केवल बोल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई कर रहे हैं. उन्होंने आतंकवाद की जो फैक्टरी लगाई है , वो सबसे बड़ी समस्या है. हमे उम्मीद है कि एक दिन हम PoK में फिजिकली मौजूद होंगे, PoK हमारा है.

एस जयशंकर ने कहा, “पहले की विदेश नीति और मोदी सरकार की विदेश नीति में सबसे बड़ा अंतर ये है कि घरेलू मुद्दों और जरूरतों मसलन निवेश, तकनीक को विदेश नीति का हिस्सा बनाया गया. दूसरा, राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को विदेश नीति में जोड़ा गया.”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विदेशों में बसे भारतीयों को विदेश नीति के साथ जोड़ना इस सरकार की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण कदम रहा. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाना हमारी प्राथमिकता है, लेकिन ये स्वीकारना होगा कि एक पड़ोसी मुल्क इस संबंध में एक चुनौती है और जब तक वो एक नॉर्मल पड़ोसी नहीं बन सकता, तब तक संबंध सामान्य कायम करना मुश्किल है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाना हमारी प्राथमिकता है, लेकिन ये स्वीकारना होगा कि एक पड़ोसी मुल्क इस संबंध में एक चुनौती है और जब तक वो एक नॉर्मल पड़ोसी नहीं बन सकता तब तक संबंध सामान्य कायम करना मुश्किल है.

विदेश मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार बनने के पहले दिन से ही विदेश मंत्रालय का काम शुरू हो गया था, जब बिम्सटेक संगठन के नेताओं को शपथ ग्रहण में आमंत्रित किया गया था.

ड्रैगन के साथ रिश्‍तों के बारे में एस जयशंकर ने कहा कि चीन के बॉर्डर पर समय-समय पर कई घटनाएं होती रही हैं, लेकिन इन्‍हें सुलझा लिया गया है. कोई झड़प नहीं हुई. दोनों देशों के बीच बहुत सी जगहों पर बॉर्डर तय नहीं है. जहां तक नेवी द्वारा चीनी युद्धपोत के बारे में पता लगाने की बात है, इसके बारे में हमारी जानकारी नहीं है और ये डिप्लोमेसी का नहीं बल्कि सुरक्षा का क्षेत्र है.

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