सीएम जगन मोहन रेड्डी का तिरुमला दर्शन विवादों में, गैर-हिंदुओं वाला फेथ फॉर्म नहीं भरने को लेकर निशाने पर

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी बुधवार को तिरुमला स्थित भगवान बालाजी (Tirumala Brahmotsavam) के मंदिर गए, जिसपर विवाद शुरू हो गया है. यहां तक कि विपक्षी पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू ने तो रेड्डी का इस्तीफा तक मांग लिया.

Jagan Mohan Reddy
भगवान बालाजी के दर्शन को गए सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी बुधवार को तिरुमला स्थित भगवान बालाजी (Tirumala Brahmotsavam) के मंदिर गए, जिसपर विवाद शुरू हो गया है. यहां तक कि विपक्षी पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू ने तो रेड्डी का इस्तीफा तक मांग लिया. सारा विवाद तिरुपति बालाजी मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश के नियमों को लेकर है.

दरअसल, तिरुमला स्थित भगवान बालाजी के मंदिर में आने वाले गैर-हिंदुओं को फेथ फॉर्म भरकर ये बताना होता है कि वो हिंदू धर्म से ताल्लुक नहीं रखते लेकिन भगवान वेंकटेश्वर को मानते हैं. आज मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी जो ईसाई धर्म से तालुकात रखते हैं, उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया मगर फेथ फॉर्म (डिक्लेरेशन) नहीं भरा, इसी पर विवाद है.

तिरुपति तिरुमाला का सालाना नौ दिनों तक चलने वाले ब्रह्मोत्सवम (Tirumala Brahmotsavam) रविवार को शुरू हुआ है. उत्सव के दौरान परंपरा के अनुसार 23 सितंबर को प्रदेश सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी भगवान वेंकटेश्वर को ‘पट्टु वस्त्रम’ देने के लिए मंदिर पहुंचे थे. उन्होंने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के सालकट्ला ब्रह्मोत्सव (Tirumala Brahmotsavam) में शामिल होकर भगवान के दर्शन किए और फिर श्री वेंकटेश्वर स्वामी के गरुड़ वाहन सेवा में शामिल हुए.

तो क्या बदलनेवाला है नियम?

बता दें कि अब यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या तिरुपति मंदिर में अब सभी धर्मों के लोगों का प्रवेश आसानी से हो सकेगा? और क्या टीटीडी मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश से जुड़े अपने पुराने नियम बदलने वाला है? दरअसल, टीटीडी के चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी ने कहा था कि भगवान वेंकटेश्वर में विश्वास रखने वाले सभी धर्मों के लोग दर्शनों के लिए आ रहे हैं.’ इसी के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे.

फिलहाल क्या है नियम

तिरुमला आने वाले गैर-हिंदुओं को फेथ फॉर्म भरकर ये बताना होता है कि वो हिंदू धर्म से ताल्लुक नहीं रखते लेकिन भगवान वेंकटेश्वर को मानते हैं. बता दें कि जगनमोहन रेड्डी ईसाई धर्म को मानते हैं. यह भी सामने आया है कि जगनमोहन रेड्डी ने कर्मचारियों को बताया था कि 2009 में पहली बार मंदिर आने पर उन्होंने फेथ फॉर्म भरा था, दोबारा उन्हें ये फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा कोई नियम नहीं है कि हर बार मंदिर आने पर फॉर्म भरना जरूरी हो.

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