Ayodhya Verdict : रिव्यू पिटिशन के बाद जमीयत नेता मदनी बोले- मस्जिद के लिए कुछ भी करेंगे

मदनी ने कहा कि हम मस्जिद को वापस पाने के लिए जहां तक जा सकते हैं वहां तक जाएंगे. यह जमीयत उलेमा ए हिंद की वर्किंग कमेटी का फैसला है.अब जो फैसला आएगा वो माना जाएगा.
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अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी ढांचा मसले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल कर दी है.

जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना सईद अरशद मदनी ने कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के बाद कहा कि हमने कानूनी लड़ाई के दौरान फैसले माने वहीं अपनी राय भी रखी है. कोर्ट ने कहा कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई है. मस्जिद की जगह पर ही मस्जिद है. इसलिए फैसला समझ में नहीं आनेवाला है.

मदनी ने कहा कि जब मस्जिद मंदिर तोड़कर नहीं बनाया गया और दूसरी तरफ कोर्ट यह भी कहता है कि जिन्होंने मस्जिद तोड़े और मूर्ति रखी वो भी अपराधी है. यह बातें कोर्ट के फैसले से मेल नहीं खाती. कानून कहता है कि फैसले के तीस दिनों के भीतर रिव्यू पिटिशन डाली जा सकती है. इसलिए हमने अर्जी दाखिल की है.

मदनी ने कहा कि हम मस्जिद को वापस पाने के लिए जहां तक जा सकते हैं वहां तक जाएंगे. यह जमीयत उलेमा ए हिंद की वर्किंग कमेटी का फैसला है.अब जो फैसला आएगा वो माना जाएगा. माहौल खराब होने की बात पर मदनी ने कहा कि हम कोई माहौल खराब नही करना चाहते. यह खराब होना तो 70 साल में होता. हम कानून के तहत ही काम कर रहे हैं. अभी जो फैसला आया है वो धार्मिक आधार पर आया है, कानूनी आधार पर नहीं.

मदनी ने कहा कि रिव्यु पिटिशन डाल कर हम अपने कानूनी हक का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये कोर्ट का अधिकार है कि उसे माने या न माने.उन्होंने कहा कि इस अर्जी के लिए हमारे वकील एयाज मकबूल होंगे क्योंकि पुराने वकील राजीव धवन की तबियत खराब है. मदनी ने बताया कि हम इस मामले की पहली पार्टी हैं. मुस्लिम लॉ बोर्ड इसमें पार्टी नहीं है. वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की ओर से कहा गया है कि हम फैसले की स्टडी कर रहे हैं और 9 दिसंबर से पहले किसी भी दिन रिव्यू पिटिशन दाखिल कर सकते हैं.

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