जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख होंगे अलग, दोनों को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा

जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाया जाएगा. जम्‍मू-कश्‍मीर में विधानसभा होगी जबकि लद्दाख में कोई विधायिका नहीं होगी.

नई दिल्‍ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर के पुनर्गठन का संकल्प पेश किया. गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को सदन में इसे पेश किया. इस विधेयक के अनुसार, जम्मू एवं कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा. इसमें जम्मू कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश रहेगा, वहीं लद्दाख दूसरा केंद्र शासित प्रदेश होगा.

शाह ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा होगी लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी. उन्होंने कहा कि जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख को अलग करने का यह कदम सीमा पार आतंकवाद के लगातार खतरे को देखते हुए उठाया गया है.उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग लंबे समय से उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग कर रहे थे और यह निर्णय स्थानीय जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लिया गया है.

जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख अलग, भड़कीं महबूबा

जम्‍मू एवं कश्‍मीर की पूर्व मुख्‍यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने केंद्र के इस कदम का विरोध किया है. उन्‍होंने ट्वीट किया, “आज भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन है. जम्मू कश्मीर के नेतृत्व का 1947 में 2-राष्ट्र थ्योरी को खारिज कर भारत में शामिल होने का निर्णय उल्टा साबित हुआ. भारत सरकार का अनुच्‍छेद को हटाने का फैसला असंवैधानिक और अवैध है.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रस्ताव पेश किया. सिर्फ 370 (1) को बरकरार रखने का प्रस्‍ताव है. उनके प्रस्ताव पेश करते ही सदन में विपक्षी नेता हंगामा करने लगे. राज्‍यसभा में अमित शाह ने कहा, “आर्टिकल 370 हटाने में एक सेकेंड की भी देरी नहीं करनी चाहिए.’

शाह ने कहा कि ‘जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. कश्मीर में लागू अनुच्‍छेद 370 में सिर्फ खंड 1 रहेगा, बाकी प्रावधानों को हटा दिया जाएगा.’

उन्‍होंने कहा, “संविधान में अनुच्छेद 370 अस्थाई था, इसका मतलब ही यह था कि इसे किसी न किसी दिन हटाया जाना था लेकिन अभी तक किसी में राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी, लोग वोट बैंक की राजनीति करते थे लेकिन हमें वोट बैंक की परवाह नहीं है.”

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