पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के उपराज्यपाल बनने से जगी उम्मीद, घाटी में रेलवे के प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के गवर्नर का पद संभालने जा रहे हैं. ऐसे में इस बात के कयास तेज हो गए हैं कि रेलवे (Railway) के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट अब जल्द पूरे होंगे.
Jammu and kashmir hope from Manoj Sinha, पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के उपराज्यपाल बनने से जगी उम्मीद, घाटी में रेलवे के प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) के जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) के उपराज्यपाल बनने की खबर के साथ ही इस बात की उम्मीद बंधी है कि जम्मू और कश्मीर से जुड़े रेल के प्रोजेक्ट जल्द और समय से पहले पूरा हो सकते हैं. रेल राज्य मंत्री रहते मनोज सिन्हा ने कई प्रोजेक्टों को हिरी झंडी दिखाई थी. कुछ ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिसपर काम भी चल रहा है तो कुछ में कई वजहों से देरी हुई है. शुक्रवार को मनोज सिन्हा जम्मू कश्मीर के गवर्नर का पद संभालने जा रहे हैं. ऐसे में इस बात के कयास तेज हो गए हैं कि रेलवे (Railway) के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट अब जल्द पूरे होंगे.

अंजी ब्रिज का काम?

जम्मू कश्मीर रेल परियोजना का अहम हिस्सा है अंजी ब्रिज (Anji Khad bridge). हाल के दिनों की बात करें तो इस ब्रिज का काम कोरोना (Coronavirus) के समय भी नहीं रुका है. तय समय के अनुसार इसे 2021 तक पूरा होना है. देश का पहला रेल ब्रिज है जो केबल यानि तारों पर टिका होगा. इसके काम में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे कि इसके एक हिस्से को दूसरे हिस्से से जल्द जोड़ा जा सके. चेनाब नदी के उपर बन रहा यह ब्रिज कटरा और रिसायी को जोड़ेगा. अंजि ब्रिज ऊधमपुर –श्रीनगर–बारामूला लिंक (U.S.B.R.L) का एक अहम हिस्सा है.

क्या है इसकी खासियत?

अंजी ब्रिज को नदी तल से 331 मीटर ऊंचा एक खंभा बनाया जा रहा है. इस खंभे से नदी के दोनों छोर पर 96 केबल लगाए जा रहे हैं और इन्हीं केबल के सहारे ट्रेन के लिए पटरी बिछाई जाएगी. इस पुल की लंबाई 473.25 मीटर है. इस ब्रिज का निर्माण कोंकण रेलवे कार्पोरेशन कर रहा है.

चेनाब पर ब्रिज बनाने में तेजी

भारतीय रेल जम्मू कश्मीर के रियासी ज़िले में चिनाब नदी पर एक हैरतअंगेज़ पुल बना रहा है. यब एक आर्च ब्रिज़ है जो नदी तल से 359 मीटर ऊंचा है. 1315 मीटर लंबे इस विशाल ब्रिज़ पर आतंकवादी हमले का भी कोई असर नहीं होगा. इसके लिए भारतीय रेल ने देश और दुनिया की तमाम एजेंसियों से मदद भी ली है. इसे साल 2019 में बनकर तैयार होना था, लेकिन कई वजहों से इसका काम पूरा नहीं हो पाया है. उम्मीद इस बात की है कि मनोज सिन्हा के आने के बाद से इस प्रोजेक्ट में भी तेजी आएगी औऱ जल्द ही इस रूट पर रेलगाड़ियां दौडने लगेंगी.

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