कश्मीरी पंडितों को वापस बुला रहीं मां खीर भवानी, हनुमानजी ने स्थापित की थी मूर्ति

मान्यताओं के अनुसार रावण माता का परम भक्त था, वो जप-तप से देवी को प्रसन्न रखता था. मगर जब रावण ने मां सीता का अपहरण किया तो देवी ने नाराज होकर अपना स्थान छोड़ दिया.

कश्मीर के मां खीर भवानी मंदिर से कश्मीरी पंडितों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कश्मीरी पंडितों को अपनी मिट्टी से जुड़ने का मौका मिला है.

एक ओर जहां 1990 से पहले यहां के मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता था. वहीं, कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से विस्थापित किए जाने के बाद मंदिर सूना पड़ गया. केवल खास त्योहारों में ही इस मंदिर में भक्तों की चहल पहल देखने को मिलती थी, लेकिन आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कश्मीरी पंडित अपनी आराध्य मां खीर भवानी के दर्शन कर सकते हैं.

मां खीर भवानी का मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर की दूरी पर तुलमुल गांव में स्थित है. यहां हर साल मई महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्‍या में भक्‍त इकट्ठे होते हैं.

हनुमानजी ने देवी को कश्मीर में स्थापित

प्रचलित मान्यताओं के अनुसार रावण माता का परम भक्त था, वो अपने जप-तप से देवी को प्रसन्न रखता था. मगर धीरे-धीरे रावण का घमंड बढ़ता गया और वो दुराचारी हो गया. जब रावण ने मां सीता का अपहरण किया तो देवी ने उससे नाराज होकर अपना स्थान छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने हनुमान से अपनी मूर्ति को लंका से दूर स्थान पर रखने को कहा. उनकी आज्ञा मानकर हनुमान ने माता की मूर्ति को तुलमुल में स्थापित कर दिया.

kashmiri pandits, कश्मीरी पंडितों को वापस बुला रहीं मां खीर भवानी, हनुमानजी ने स्थापित की थी मूर्ति

खीर के भोग से खुश होती है देवी

मां खीर भवानी के मंदिर खीर का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि खीर का भोग लगाने से मां भक्तों से प्रसन्न रहती हैं. बाद में यही खीर प्रसाद के रूप में भक्तों को बांटी जाती है. मां खीर भवानी को स्थानीय लोग कश्मीर की देवी भी कहते हैं.

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मंदिर के पास है चमत्कारी झरना

माता के मंदिर के पास एक चमत्कारी झरना काफी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि जब इस जगह कोई मुसीबत आने वाली होती है तो झरने का पानी काला पड़ जाता है. लोगों के मुताबिक कश्मीर में जब 2014 में झरने का पानी काला पड़ा था तो कश्मीर में भीषण बाढ़ आई थी.

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