कश्मीरी पंडितों ने फारूख अब्दुल्ला के सामने लगाए ‘मोदी-मोदी’ ‘हर-हर महादेव’ के नारे

फारूक अब्दुल्ला ज्येष्ठा देवी मंदिर में कश्मीरी पंडितों से मिलने पहुंचे थे. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक फारूख अब्दुल्लाह को मंदिर में घुसने भी नहीं दिया गया.

फारूक अब्दुल्ला
File Photo

जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्लाह के सामने कश्मीरी पंडितों ने नारेबाजी कर दी. नारेबाजी का वीडियो गुरूवार को वायरल हुआ. वीडियो में लोग फारूख अब्दुल्ला को घेरकर नारेबाजी कर रहे हैं. दरअसल, देशभर में रहने वाले कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी के पास स्थित ज्येष्ठा देवी श्राइन मंदिर में हमेशा से दर्शन और पूजा करने पहुंचते हैं.

जानकारी के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला ज्येष्ठा देवी मंदिर में कश्मीरी पंडितों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन फारूख अब्दुल्ला के मंदिर परिसर में पहुंचते ही कश्मीरी पंडितों ने ‘मोदी-मोदी’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारे लगाने शुरू कर दिए. इस घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला को लोगों को संबोधित किए बिना वापस जाना पड़ा.

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक फारूख अब्दुल्लाह को मंदिर में घुसने भी नहीं दिया गया. कश्मीरी पंडित फारूख अब्दुल्ला से घाटी से उनको हटाए जाने के बारे में सवाल पूछ रहे थे. हालांकि फारूख अब्दुल्ला के समर्थकों ने वहां मौजूद भीड़ को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह माने नहीं और मोदी-मोदी, हर- हर महादेव के नारे लगाते रहे.

लोगों की भीड़ देख फारूख शांत रहें और उनके समर्थक भीड़ को ये समझाने की कोशिश करते रहे कि एनसी नेता को एक बार सुन ले कि वह क्या कहना चाहते हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ये वीडियो

क्या है कश्मीर पंडितोंं का मसला

1990 में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की वजह से कश्मीरी पंडितों को घाटी से जबरन निकाल दिया गया था. इस दौरान तकरीबन 1.5 लाख हिंदुओं का पलायन हुआ था. तभी से ये कश्मीरी पंडित राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों में शरणार्थी बनकर अपना जीवन जीने को मजबूर हैं.

ज्येष्ठा देवी श्राइन मंदिर कश्मीरी घाटी के नजदीक है और यहां पर कश्मीरी हिंदू हमेशा से पूजा- पाठ करने आते रहते हैं. इसी क्रम में कुछ कश्मीरी पंडित वहां दर्शन करने पहुंचते थे. कश्मीरी पंडितों की लंबे अरसे ये मांग रही है कि उनकी कश्मीर में वापसी हो.

जानकारी के मुताबिक फारूख अब्दुल्ला से इसलिए नाराज बताए जा रहे थे कि उनका मानना था कि जब राज्य में नेशनल कांफ्रेंस की सरकार थी और वह केंद्र सरकार में भी साझेदार थे, तब पूर्व मुख्यमंत्री ने कश्मीरी पंडितों का मुद्दा नहीं सुलझाया और उन्हें राज्य में पुर्नस्थापित करने में मदद नहीं की.

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