क़ुतुब मीनार से दोगुने ऊंचे पुल पर दौड़ेगी ट्रेन, 2021 तक बन जाएगी जिरीबाम-तुपुल-इंफाल रेलवे लाइन

जिरिबाम-तुपुल-इंफाल रेल लाइन असम के कछार जिले से सटे मणिपुर और जिरिबाम की पश्चिमी सीमा को राज्य की राजधानी इंफाल से जोड़ेगी. यहां अब तक रेल कनेक्टिविटी नहीं पहुंची है.
Jiribam-Tupul-Imphal railway line, क़ुतुब मीनार से दोगुने ऊंचे पुल पर दौड़ेगी ट्रेन, 2021 तक बन जाएगी जिरीबाम-तुपुल-इंफाल रेलवे लाइन

मणिपुर में जिरीबाम-तुपुल-इंफाल रेलवे लाइन को दिसंबर 2021 से पहले पूरा कर लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने मारंगचिंग (मारंग पहाड़ी) में शनिवार को ये बातें कही. उन्होंने कहा कि मार्च 2022 के अंत तक इसका उद्घाटन किया जा सकता है. इस रेलवे लाइन के पूरा होने का लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है.

वीके यादव तुपुल रेल लाइन के लिए सुरंगों के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करने आए मणिपुर के नोनी जिले में थे. उन्होंने महाप्रबंधक नॉर्थईस्टर्न फ्रंटियर रेलवे संजीव रॉय की मौजूदगी में तुपुल रेल लाइन की सुरंग 4 का उद्घाटन भी किया. उन्होंने कहा कि यह रेलवे परियोजना केंद्र सरकार की सबसे प्राथमिकता वाली परियोजना में एक है.

दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल पर चलेगी ट्रेन

इस रेलवे लाइन के कुल 45 छोटी-बड़ी सुरंगों में तुपुल लाइन में भारत की सबसे लंबी सुरंग है. यह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल पर चलेगी. यह दिल्ली स्थित कुतुब मीनार से दोगुनी ऊंचाई पर है. तुपुल में कुल 6 सुरंगों में से 5 पूरी हो चुकी हैं. फिलहाल बस एक टनल ही निर्माणाधीन है.

रेलवे की इस राष्ट्रीय परियोजना को 2008 में 12,500 करोड़ की कुल लागत के साथ मंजूरी दी गई थी. निर्माण 2009 से शुरू हुआ था. निर्माण में वीएलसीसी-एचसीसी संयुक्त उद्यम की ओर से लगे लगभग सात हजार श्रमिकों काम कर रहे हैं. इससे पहले, परियोजना को 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था.

यहां अब तक नहीं पहुंची रेल कनेक्टिविटी

जिरिबाम-तुपुल-इंफाल रेल लाइन असम के कछार जिले से सटे मणिपुर और जिरिबाम की पश्चिमी सीमा को राज्य की राजधानी इंफाल से जोड़ेगी. यहां अब तक रेल कनेक्टिविटी नहीं पहुंची है. पूर्वोत्तर सीमांत रेल लाइन पर इस निर्माणाधीन सुरंग पूरा होने के बाद यह देश की सबसे बड़ी रेल सुरंग हो जाएगा.

इससे पहले कश्मीर घाटी में पीर पंजाल रेलवे सुरंग सबसे लंबी सुरंग है. उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल मार्ग पर बने इस सुरंग की लंबाई 11.2 किलोमीटर है. इसके बनने से काजीगुंड और बानिहाल के बीच की दूरी काफी कम हो गई है.

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