13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में महिला सदस्‍य, जानें कौन हैं जस्टिस भानुमती

जस्टिस भानुमती को आपराधिक मामलों की हैंडलिंग के लिए जाना जाता है. निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में दोषियों को मौत की सजा सुनाने वाली बेंच में जस्टिस भानुमती भी शामिल थीं.

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में एक दशक के बाद जस्टिस आर.भानुमती (Justice R Bhanumathi) के रूप में महिला सदस्य शामिल हुई हैं. भानुमती, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के रविवार को सेवानिवृत्त होने के बाद इसका हिस्सा बन जाएंगी.

उनसे पहले, लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में सेवा देने वाले न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रूमा पाल कॉलेजियम प्रणाली का तीन साल तक 4 जून, 2006 को सेवानिवृत्त होने तक इसका हिस्सा रहीं. पाल को 28 जनवरी, 2000 को शीर्ष कोर्ट का न्यायधीश नियुक्त किया गया था.

कौन हैं Justice R Bhanumathi?

न्यायमूर्ति भानुमती, तमिलनाडु से हैं. न्यायमूर्ति भानुमती का जन्म 20 जुलाई 1955 को हुआ. वह तमिलनाडु की पहली महिला जज हैं. 1988 में उन्‍होंने तमिलनाडु हायर जुडिशियल सर्विस ज्‍वॉइन की. उन्हें सीधे तौर पर जिला न्यायाधीश नियुक्त किया गया.

नवंबर 2013 में जस्टिस भानुमती को झारखंड हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया और वहां का चीफ जस्टिस बना दिया गया. अगस्‍त 2014 में तत्‍कालीन CJI आरएम लोढ़ा की अध्‍यक्षता वाले कॉलेजियम ने उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की.

वह उन जजों में से हैं जिन्‍होंने अपनी संपत्ति का खुलासा कर रखा है. जस्टिस भानुमती को आपराधिक मामलों की हैंडलिंग के लिए जाना जाता है. निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में दोषियों को मौत की सजा सुनाने वाली बेंच में जस्टिस भानुमती भी शामिल थीं.

वह शीर्ष कोर्ट के पांच सीनियर न्यायाधीशों में से हैं, जो नियमों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम का हिस्सा हैं. वह सबऑर्डिनेट अदालतों से देश की शीर्ष कोर्ट तक पहुंचने वाली दूसरी महिला हैं.

अब कॉलेजियम में कौन-कौन?

कॉलेजियम विभिन्न हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करता है. जस्टिस भानुमती के अलावा, न्यायमूर्ति एस.ए.बोबडे, न्यायमूर्ति एन.वी. रमना और अरुण मिश्रा और आर.एफ. नरीमन कॉलेजियम का हिस्सा हैं.

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