‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की बात पर भड़के कमल हासन, बोले- ऐसा हुआ तो जलीकट्टू से भी बड़ा आंदोलन

कमल हासन ने एक वीडियो जारी कर अप्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा है कि भारत 1950 में 'अनेकता में एकता' के वादे के साथ गणतंत्र बना था

नई दिल्ली: हिंदी दिवस के मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की बात कही थी जिस पर सियासी संग्राम छिड़ गया है. अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने केंद्र सरकार को ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ को बढ़ावा देने के खिलाफ चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो जल्लीकट्टू से भी बड़ा आंदोलन होगा.

कमल हासन ने एक वीडियो जारी कर कमल ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा है कि भारत 1950 में ‘अनेकता में एकता’ के वादे के साथ गणतंत्र बना था और अब कोई ‘शाह, सुल्तान या सम्राट’ इससे इनकार नहीं कर सकता है. बता दें कि अमित शाह ने हिंदी दिवस पर ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की पैरवी की थी.


वीडियो किया जारी
वीडियो में कमल ने कहा है कि वह सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं लेकिन उनकी मातृभाषा हमेशा तमिल रहेगी. मक्कल निधि मैय्यम अध्यक्ष ने सोमवार को अपने ट्विटर हैंडल से एक विडियो जारी किया. इसमें उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा कि इस बार एक बार फिर भाषा के लिए आंदोलन होगा और यह जल्लीकट्टू आंदोलन से भी बड़ा होगा. उन्होंने आगे कहा कि भारत या तमिल नाडु को ऐसी जंग की जरूरत नहीं है.

सरकार को चेतावनी
कमल हासन ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘जल्लीकट्टू तो सिर्फ विरोध प्रदर्शन था. हमारी भाषा के लिए जंग उससे कई गुना ज्यादा होगी. राष्ट्रगान भी बांग्ला में होता है, उनकी मातृभाषा में नहीं. वह जिस बात का प्रतीक है, उसकी वजह से हम उसे गाते हैं और इसलिए क्योंकि जिस शख्स ने उसे लिखा वह हर भाषा को अहमियत और सम्मान देते थे.’ कमल ने कहा कि भारत एक संघ है जहां सभी सौहार्द के साथ मिलकर बैठते हैं और खाते हैं. हमें बलपूर्वक खिलाया नहीं जा सकता.

दक्षिण भारत की पार्टियों का विरोध
गौरतलब है कि हिंदी दिवस पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा एक देश-एक भाषा के सिद्धांत का पक्ष लिए जाने के बाद अब दक्षिण भारत के राजनीतिक दल इसके विरोध में उतर आए हैं. तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के नेता एम के स्टालिन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अपनी नीतियों में तमिलनाडु के साथ भेदभाव कर रही है और यहां के लोगों पर जबरन हिंदी भाषा को थोपा जा रहा है.

केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा है कि हिंदी सबको एक करने वाली भाषा है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह देश की क्षेत्रीय भाषाओं को दबा नहीं सकती है. उन्होंने कहा, ‘तीन भाषाओं का फॉर्म्युला हम सभी को मान्य है. यहां तक कि प्रधानमंत्री ने भी सदन में कहा था कि क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान होगा.’