ताकत की दवा खाकर आए थे हत्‍यारे, कई साल तक रची साजिश? पढ़ें कमलेश हत्याकांड की पूरी कहानी

साल 2015 में कमलेश उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर अत्यधिक विवादास्पद टिप्पणी की थी. इस पर काफी विवाद हुआ और पूरे देश में इसको लेकर मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया था.

लखनऊ: देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई. हत्यारों ने बहुत ही बेरहमी से कमलेश तिवारी के गले में चाकूओं से कई वार किए. हत्या के बाद मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण यूपी पुलिस ने हत्यारों को पकड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं जिसमें से तीन गुजरात के सूरत से और दो उत्तर प्रदेश में पकड़े गए हैं. इन पांचों से पुलिस पूछताछ कर रही है. इस मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. यूपी पुलिस डीजीपी ने भी साफ किया है कि वो किसी भी एंगल को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं.

एसटीएफ ने जिन तीन लोगों को सूरत से पकड़ा है, उनसे बातचीत के बाद शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि अशफाक अकेले इस काम को अंजाम देने में घबरा रहा था, उसके हाथ-पांव फूल रहे थे ऐसे में दूसरे हमलावर मोइनुद्दीन पठान को गला काटने की जिम्मेदारी मिली थी. इन दोनों ने कमलेश के घर जाने से पहले होटल में घबराहट मिटाने के लिए दवा ली थी, साथ ही साथ ताकत की दवा भी खाई थी.

फिलहाल इस मामले के दो मुख्य आरोपी पुलिस गिरफ्त से दूर हैं. पुलिस इन दोनों को पकड़ने के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है. यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने हत्‍या के आरोपी फरीद उर्फ मोइन खान पठान और अशफाक खान पठान पर ढाई-ढाई लाख रुपये का इनाम घोषित क‍िया है. ये दोनों आरोपी कही पर ठहर नहीं रहे. बातचीत करने के लिए ये लोग राह चलते लोगों के मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब हम आपको इस पूरी घटना के को सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं…

साल 2015 में कमलेश उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर अत्यधिक विवादास्पद टिप्पणी की थी. इस पर काफी विवाद हुआ और पूरे देश में इसको लेकर मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया था. तिवारी की टिप्पणी के बाद सहारनपुर और देवबंद विशेष रूप से उबाल पर थे, जिसके बाद सड़कों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. इस हत्या की वजह पैगंबर मोहम्मद साहब पर की गई इसी टिप्पणी को लेकर किया जा रहा है.

अब तक जांच में क्या-क्या हुआ
सूरत से लखनऊ आते वक्त ट्रेन में विजय नाम के एक शख्स से इन दोनों की दोस्ती हुई, यह दोस्ती यह कहकर हुई कि इनका फोन रास्ते में गुम हो गया है. और उनका परिवार से संपर्क नहीं हो रहा है, इसी के बाद विजय ने कानपुर के एक दुकान से जियो सिम की व्यवस्था कराई जिसमें अशफाक ने अपने ओरिजिनल आई-कार्ड से मोबाइल का सिम खरीदा था.
मिली जानकारी के मुताबिक, कानपुर उतरने के बाद हत्यारे सड़क के रास्ते लखनऊ पहुंचे थे. कानपुर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी से इसकी तस्दीक हुई है. उसी दिन उनकी लोकेशन हरदोई, बरेली और उसके बाद गाजियाबाद में पाई गई. पता चला है कि हत्‍यारों की पीलीभीत के एक नंबर से भी बात हुई है.

1- सूरत के रहने वाले ये दोनों आरोपी लखनऊ पहुंचे थे. इसके बाद लखनऊ के लालबाग स्थित होटल खालसा के कमरा नंबर जी (103) में ठहरे हुए थे. होटल में दोनों आरोपियों ने आईडी के तौर पर अपना आधार कार्ड दिया था. आधार कार्ड से हत्यारों की पहचान सूरत निवासी शेख अशफाक हुसैन और पठान मोइनुद्दीन अहमद के रूप में हुई थी.

2- कमलेश तिवारी राजधानी लखनऊ में रोज की तरह अपने दफ्तर में बैठे थे तभी दोनों हत्यारे उनसे मिलने आए. उनके हाव-भाव देख ऐसा मालूम हुआ जैसे वो कमलेश तिवारी को पहले से ही जानते हो. काफी देर तक बातचीत करते रहे. इस दौरान चाय नाश्ता भी हुआ. फिर नौकर को बुला सिगरेट और कुछ सामान लेने के लिए बाहर भेज दिया. हमलावर अपने साथ मिठाई के डिब्बे में चाकू और रिवाल्वर लेकर आए थे. मौका पाते ही कुलदीप तिवारी पर हमला बोल दिया.

3- शनिवार रात को होटल प्रबन्धन से सूचना मिलने पर लखनऊ पुलिस ने इस होटल को खंगाला था. हत्यारों जिस कमरे (जी-103) में रुके थे वहां से खून से सने भगवा कपड़े, हत्या में इस्तेमाल चाकू और बैग बरामद हुआ था. इसके अलावा शेविंग क्रीम, ब्लेड समेत कई और चीजें भी मिली.
हत्यारों ने 17 अक्तूबर की रात रिसेप्सन पर मौजूद मैनेजर से 1300 रुपये प्रतिदिन किराये पर कमरा तय किया था. एक हजार रुपये एडवान्स दिये थे और रात में रोटी-सब्जी मंगवा कर खायी थी.

4- दूसरे दिन भगवा वेश में निकलने के बाद जब ये हत्या कर लौटे तो आनन फानन कपड़े बदल कर फिर निकले गए थे. दोनों ने होटल से ‘चेक आउट’ नहीं किया था. 18 अक्तूबर को दोपहर 1:37 पर निकलते समय रिसेस्पशन पर मौजूद महिला कर्मचारी को चाभी देकर दोनों ने यह कहा था कि कुछ देर बाद आयेंगे. शुक्रवार रात और शनिवार को दिनभर जब ये नहीं लौटे तो होटल कर्मचारियों को शक हुआ. हत्यारों की फोटो भी वायरल हो चुकी थी.

5- पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद ये दोनों शख्स गोरखपुर के पास पलिया गए थे. यहां से इन्होंने एक इनोवा गाड़ी बुक की. गाड़ी के ड्राइवर को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की. तब पता चला कि इस गाड़ी के मालिक ने कैब ले जाने को कहा था. दोनों के बीच पांच हजार रूपये में डील तय हुई थी. गाड़ी का मालिक पलिया का ही बताया जा रहा है. गाड़ी मालिक के रिश्तेदार गुजरात के रहने वाले हैं. रिश्तेदार के कहने पर ही इनके लिए गाड़ी उपलब्ध कराई गई थी.

6- इनोवा कैब से ये लोग शाहजहांपुर गए. रेलवे स्टेशन के पूछताछ काउंटर पर जाकर उन्होंने ट्रेन के बारे में पता किया। दोनों ने सिगरेट पी, इसके बाद इनोवा गाड़ी छोड़ दी. दोनों हत्यारे पैदल ही स्टेशन रोड से अशफाकनगर पुलिस चौकी की ओर जाते हुए सीसीटीवी में कैद हुए हैं. पुलिस की टीम जब तक वहां पहुंची तब तक हत्यारे वहां से भी फरार हो चुके थे. बाद में पता चला कि ये बुलंदशहर की ओर निकल गए है.

7- इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब रोहित सोलंकी का जिक्र हुआ. रोहित सोलंकी कोई और नहीं बल्कि दोनों हमलावरों में से ही एक अशफाक ही था. उसने पहले फर्जी फेसुबक आईडी बनाई फिर कमलेश तिवारी से दोस्ती की. अशफाक ने फर्जी आईडी से कमलेश से बातचीत की और पार्टी ज्वाइन करने की बात कही. यहीं से दोनों के बीच काफी मित्रता बढ़ी और फिर अशफाक ने मिलने के लिए समय मांगा. उसके बाद ही लखनऊ आए और हत्या को अंजाम दिया.

8- इस हाईप्रोफाइन मर्डर केस में पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है. ये दोनों आरोपी नेपाल भागने के फिराक में भी थे लेकिन बॉर्डर में सख्ती के कारण ये लोग बार-बार लोकेशन बदल रहे हैं. इस मामले में पुलिस हर उस शख्स को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है जिनसे ये लोग संपर्क कर रहे हैं.