करगिल: 16,000 फीट ऊंची पहाड़ियों पर लिखे शहादत के वो किस्से, जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे

जांबाजी का एक किस्सा जुड़ा है नायक दिगेंद्र सिंह से, जिन्होंने अपने चाकू से एक पाकिस्तानी मेजर का सिर धड़ से अलग कर दिया और धड़ में तिरंगा गाड़ दिया.

तोलोलिंग: करगिल युद्ध सिर्फ एक युद्ध ही नहीं बल्कि भारतीय सेना के शौर्य की कहानी भी है. इस कहानी की शुरुआत होती है तोलोलिंग फतह के साथ. करगिल युद्ध की इस पहली जीत के लिए भारतीय सेना की 18 ग्रैनेडियर्स यूनिट को 25 जवानों की शहादत देनी पड़ी थी. इन्हीं में से एक थे मेजर राजेश अधिकारी, जो 30 मई 1999 को तोलोलिंग की चोटियों पर शहीद हो गए. देश पर शहीद होने के बाद उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया.

उनकी शहादत से जुड़ा एक किस्सा मशहूर है. दरअसल मेजर राजेश अधिकारी की करगिल युद्ध के ठीक एक साल पहले ही शादी हुई थी. मेजर अधिकारी जिस दिन शहीद हुए उसके ठीक एक दिन पहले यानी 29 मई को उन्हें घर से एक चिट्ठी आई थी. मेजर अधिकारी ने वो चिट्ठी पढ़ने की जगह संभाल कर अपनी जेब में रख ली. उनका कहना था कि पहले दुश्मनों से निपट लूं…चिट्ठी सुबह पढ़ लूंगा.

हालांकि देश पर जान कुर्बान करने वाले मेजर अधिकारी का ये सपना कभी साकार नहीं हुआ. चिट्ठी को जेब में रख कर तोलोलिंग फतह करने के लिए निकले मेजर अधिकारी ने रात भर पाकिस्तानियों से युद्ध लड़ा. दुश्मनों से जंग लड़ते-लड़ते मेजर अधिकारी शहीद हो गए. शहादत के बाद जब तिरंगे में लिपटा उनका शव जब उनके घर पहुंचा तो वो चिट्ठी भी ठीक वैसी ही, बिना खुली बिना पढ़ी, उन्हीं के साथ घर पहुंचा दी गई.

जांबाजी का ऐसा ही एक किस्सा 2 राजपूताना राइफल के नायक दिगेंद्र सिंह का भी है. नायक दिगेंद्र सिंह ने करगिल की जंग में 48 पाकिस्तानियों को मार गिराया था. उनके बारे में एक बात कही जाती है कि घायल होने के बाद उनके हाथ से एलएमजी कहीं गिर गई थी और उनके सामने एक पाकिस्तानी मेजर आ गया था. नायक दिगेंद्र ने अपने चाकू से उस पाकिस्तानी मेजर का सिर धड़ से अलग कर दिया और धड़ में तिरंगा गाड़ दिया. करगिल विजय की गाथा लिखने  के लिए स्याही के रूप में अपना खून देने वाले ऐसे ही जांबाजों से जुडे़ किस्से देखें वीडियो में.

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