दिल्ली दंगों में IB ऑफिसर के मर्डर के आरोपी AAP नेता ताहिर हुसैन की जमानत अर्जी खारिज

अतिरिक्त सेशन जज विनोद यादव ने कहा कि, “अदालत के पास काफी सबूत हैं जो यह साबित करते हैं कि ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) उस वक्त दंगा-स्थल पर मौजूद थे और विशेष समुदाय के लोगों को उकसा रहे थे."
karkardooma Court denies bail to Tahir Hussain, दिल्ली दंगों में IB ऑफिसर के मर्डर के आरोपी AAP नेता ताहिर हुसैन की जमानत अर्जी खारिज

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने IB ऑफिसर अंकित तिवारी के मर्डर के आरोपी आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान AAP नेता ताहिर ने दंगाइयों को भड़काया था, जिसके बाद अंकित तिवारी की हत्या कर दी गयी थी.

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कोर्ट ने कहा, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे पूरी प्लानिंग के साथ किए गए थे

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) के खिलाफ दंगे में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया है. अतिरिक्त सेशन जज विनोद यादव ने कहा कि, “अदालत के पास काफी सबूत हैं जो यह साबित करते हैं कि हुसैन उस वक्त दंगा-स्थल पर मौजूद थे और कुछ विशेष समुदाय के लोगों को उकसा रहे थे. उन्होंने उन दंगाइयों का ‘मानवीय हथियार’ (Human Weapon) की तरह इस्तेमाल किया.”

सेशन जज ने यह भी कहा, ‘इस मामले में जांच अभी जारी है. 7 जुलाई को राहुल कसाना और गिरीश पाल नाम के 2 शख्सों के बयान भी रिकॉर्ड किए गए हैं. उन दोनों ने बताया कि 24 फरवरी को ताहिर हुसैन के घर दंगों की प्लानिंग की गयी थी.’ कोर्ट ने कहा कि जेल से छूटने पर ताहिर गवाहों को धमका भी सकते हैं. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे पूरी प्लानिंग के साथ किए गए थे. और इस मामले में हुसैन के पिंजरा तोड़, जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी, एंटी CAA प्रोटेस्टर के साथ कनेक्शन की भी जांच-पड़ताल की जा रही है.

ताहिर हुसैन के वकील ने कहा कि पुलिस जान-बूझकर गवाहों के बयान में देरी कर रही है

वहीं ताहिर हुसैन के वकील जावेद अली ने उनका पक्ष रखते हुए कहा कि अदालत के पास ऐसे कोई पुख्ता सबूत, कोई CCTV फुटेज नहीं हैं जो यह साबित करते हैं कि IB ऑफिसर अंकित तिवारी की हत्या में हुसैन का कोई हाथ था. उन्होंने कहा कि पुलिस जान-बूझकर उन गवाहों के बयान नहीं दर्ज कर रही है, जो यह साबित कर सकें ताहिर कि उस वक्त दंगा-स्थल पर मौजूद नहीं थे.

इसके विपरीत सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस गवाहों के बयान में देरी कैसे कर सकती है जब उसे खुद नहीं पता उस वक्त दंगा-स्थल पर कितने लोग मौजूद थे. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ चश्मदीद गवाहों ने साफ़-साफ़ पहचाना है कि हुसैन उस वक्त दंगा-स्थल पर मौजूद थे और कुछ विशेष समुदाय के लोगों को उकसा रहे थे.

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