कर्नाटक सियासी संकट: एचडी कुमारस्वामी होटल ताज वेस्ट एंड में करेंगे बैठक

कांग्रेस विधायक आनंद सिंह ने भी पहली जुलाई को इस्तीफा दे दिया था.

बेंगलुरु: मुंबई में सोफिटेल होटल के बाहर कर्नाटक कांग्रेस के विधायक एसटी सोमशेखर ने कहा, ‘हमने 13 विधायकों ने स्पीकर को इस्तीफा सौंपा और राज्यपाल को सूचित किया. हम सब साथ हैं. बेंगलुरु वापस जाने और इस्तीफे वापस लेने का कोई सवाल नहीं है.

बीजेपी की राज्य इकाई ने अपने विधायकों के लिए बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर रोड पर रामदा होटल में दो दिनों के लिए 30 कमरे बुक किए हैं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी बेंगलुरु पहुंच गए हैं और वह जेडीएस दफ्तर में शाम 7 बजकर 30 मिनट पर बैठक करेंगे.

कांग्रेस पार्टी ने सभी विधायकों को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में शामिल होने के लिए सर्कुलर जारी किया है. सीएलपी नेता सिद्धारमैया द्वारा 9 जुलाई को आयोजित बैठक में कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख दिनेश गुंडू राव भी शामिल होंगे. जो भी कांग्रेसी नेता इस बैठक में शामिल नहीं हुआ तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.

कर्नाटक के मौजूदा राजनीतिक संकट के लिए कांग्रेस ने बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है. इस पर बीजेपी नेता मुरलीधर राव ने कहा, ‘यह आरोप बकवास और बेबुनियाद हैं. किसी अन्य पार्टी के खिलाफ आरोप लगाना, जिसका कांग्रेस के आंतरिक मामलों से कोई लेना-देना नहीं है, ऐसे आरोपों से उन्हें कुछ हासिल होने वाला नहीं है.”

बेल्लारी ग्रामीण से कांग्रेस पार्टी के विधायक बी नागेंद्र, जो मुंबई के सोफिटेल होटल में मौजूद विधायकों में से एक हैं, को कांग्रेस नेताओं ने बेंगलुरु के विंडसर मैनर होटल में बुलाया है.

प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लिया हिरासत में

महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूरज सिंह ठाकुर अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सोफिटेल होटल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और कर्नाटक के कांग्रेसी विधायकों से अपना इस्तीफा वापस लेने की मांग कर रहे थे. तभी पुलिस ने उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया.

कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक 9 जुलाई को बेंगलुरु के विधान सभा में होगी. कांग्रेस पार्टी के नेता एच के पाटिल ने कहा, “पार्टी के नेता नाराज विधायकों से बात कर रहे हैं. सब कुछ ठीक हो जाएगा. बीजेपी ही इस समस्या को पैदा कर रही है, लेकिन सरकार स्थिर होगी. सरकार सुरक्षित है और यह सुरक्षित रहेगी. हमारे सभी विधायक वापस आएंगे.”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी दिल्ली से स्पेशल फ्लाइट के जरिए बेंगलुरु के लिए रवाना हो गए हैं.

डीके शिवकुमार का मानना, जल्द थमेगा विवाद

कर्नाटक में जारी सियासी संकट कब तक ख़त्म होगा, इस बारे में ठीक-ठीक कुछ भी अंदाज़ा बेईमानी होगी. लेकिन कांग्रेस के संकटमोचक कह जाने वाले डीके शिवकुमार का कहना है कि जल्द ही मामला शांत हो जाएगा.

जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा से उनके आवास पर मुलाक़ात करने के बाद उन्होंने यह बात कही. इस बैठक में जेडीएस नेता एचडी रेवाना, डी कुपेंद्र रेड्डी, एचके कुमारस्वामी और डीसी थमन्ना भी मौजूद हैं.

मुलाक़ात के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘जेडीएस ने अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है हम भी अपने सभी विधायकों के साथ मीटिंग कर इस मसले को सुलझाने जा रहे हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि मामला जल्द ही शांत हो जाएगा. सरकार को सामान्य तरीके से चलने देना का फ़ैसला देशहित और पार्टी हित का होगा. मुझे पूरा भरोसा है हमारे सभी विधायक वापस आ जाएंगें…

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने सब ठीक होने का दिया भरोसा

वहीं कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने पार्टी के बाग़ी विधायकों को लेकर कहा, ‘मैं 5-6 विधायकों के संपर्क में हूं. मैं सभी बातों का खुलासा नहीं कर सकता. सभी लोग पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं. सवाल मेरे प्रति वफादारी दिखाने का नहीं है सभी सदस्यों से पार्टी के प्रति वफ़ादार होने की उम्मीद की जाती है.’

सिद्धरमैया ने विश्वास जताते हुए कहा कि सरकार को कोई खतरा नहीं है. इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बीजेपी है.  ‘ऑपरेशन लोटस’ की वजह से ऐसी स्थिति उतपन्न हुई है. सिद्धरमैया ने कहा कि सबकुछ ठीक है, मैं विधायकों से बात कर रहा हूं.

मल्लिकार्जुन खड़गे हो सकते हैं अगले सीएम?

इसी बीच जानाकारी ये भी मिल रही है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्य का अगला सीएम बनाया जा सकता है. हालांकि यह ख़बर पूरी तरह से मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है क्योंकि स्वयं खड़गे ने इसे अफ़वाह करार दिया है.

खड़गे ने इस ख़बर को अफ़वाह बताते हुए कहा, ‘मुझे नहीं पता, मैं बस इतना चाहता हूं कि राज्य की गठबंधन सरकार चलती रहे. इस तरह की अफ़वाह पार्टी तोड़ने के लिए फैलाई जा रही है.’

बता दें कि कांग्रेस-जेडीएस के इस्तीफ़ा देने वाले 11 विधायकों में से 10 विधायक मुंबई के सोफिटेल होटल में ठहरे हुए हैं. माना जा रहा है कि रविवार को यहां पर बीजेपी नेता से मुलाक़ात होगी.

येदियुरप्पा बोले शाम 4 बजे सब कुछ हो जाएगा साफ

वहीं कर्नाटक के बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘मैं तुमकुर जा रहा हूं और शाम 4 बजे तक वापस आऊंगा. आपको राजीनिक घटनाक्रम के बारे में पता ही है. देखते रहिए क्या होता है? मैं सिद्धारमैया और एचडी कुमारस्वामी के आरोप को लेकर कुछ भी नहीं बोलना चाहता. मैं इस घटनाक्रम में कहीं नहीं हूं.’

दरअसल कर्नाटक में सत्तारूढ़ 13 महीने पुरानी कांग्रेस-जनता दल (सेकुलर) गठबंधन सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए कांग्रेस के आठ और जेडीएस के तीन विधायकों ने शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में अपने इस्तीफे सौंप दिए थे.

विधानसभा अध्यक्ष के.आर. रमेश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “मुझे मेरे निजी सचिव से पता चला है कि 11 विधायकों ने मेरे कार्यालय में त्याग-पत्र दे दिए हैं. उन्हें उसकी पावती दे दी गई. मैं उन्हें मंगलवार (9 जुलाई) को देखूंगा क्योंकि सोमवार को मैं छुट्टी पर हूं.”

कांग्रेस के जिन विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उसमें से कई विधायकों का कहना है कि अगर सिद्धारमैया सीएम बनते हैं तो वे अपना इस्तीफा वापस ले सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, विश्वास मत होने तक कांग्रेस के सभी एमएलए को किसी दूसरे राज्य भेजा जा सकता है. वहीं, राज्य के सीएम कुमारस्वामी सियासी संकट के बीच अपना अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़कर लौट रहे हैं.

कांग्रेस सूत्रों ने नई दिल्ली में कहा कि राज्य के प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल इस समय केरल में हैं और वह बेंगलुरू पहुंच रहे हैं तथा कांग्रेस विधायकों से मिलेंगे.

इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के पांच विधायकों में प्रतापगौड़ा पाटील (मस्की), बी.सी. पाटील (हिरेकेरुर), रमेश जरकीहोली (गोकक), शिवराम हेब्बर (येल्लापुर), महेश कुमताहल्ली (अथानी), रामालिंगा रेड्डी (बीटीएम लायौट), एस.टी. सोमशेकर (यशवंतपुर) और एस.एन. सुब्बा रेड्डी (कोलार में केजीएफ) शामिल हैं.

जेडीएस के तीन विधायकों में ए.एच. विश्वनाथ हुनसुर, एन. नारायणा गौड़ा के.आर. पेटे और गोपालैया (बेंगलुरू उत्तरपश्चिम में महालक्ष्मीम) शामिल हैं.

यद्यपि जरकीहोली ने पहली जुलाई को ही इस्तीफा दे दिया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था, क्योंकि यह उनके कार्यालय को फैक्स के जरिए भेजा गया था, जो प्रक्रिया के खिलाफ है.

कांग्रेस विधायक आनंद सिंह ने भी पहली जुलाई को इस्तीफा दे दिया था. चूंकि उन्होंने अपना इस्तीफा खुद जाकर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा था, लिहाजा इसे उन्होंने स्वीकार किया था.

चूंकि विधायकों की मुलाकात विधानसभा अध्यक्ष से उनके कार्यालय में नहीं हो पाई, इसलिए वे अपने इस्तीफे के निर्णय से राज्यपाल वजुभाई वाला को अवगत कराने के लिए राजभवन गए.

ए.एच. विश्वनाथ ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा कि तीन और विधायक जल्द ही इस्तीफा देंगे. वह इस्तीफा दे चुके अन्य विधायकों के साथ मीडिया के समक्ष उपस्थित हुए.

राज्यपाल के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि विधायकों ने इस्तीफे की एक प्रति वाला को दी है, क्योंकि वे विधानसभा अध्यक्ष को व्यक्तिगत तौर पर इस्तीफे की प्रतियां नहीं दे पाए थे.

बेंगलुरू दक्षिण में बीटीएम लायौट विधासभा सीट से सात बार के विधायक रेड्डी पूर्व की कांग्रेस सरकार में मंत्री थे.

कांग्रेस के तीन और विधायक कथित तौर पर इस्तीफे पर विचार कर रहे हैं. इनमें रेड्डी की बेटी सौम्या(जयानगर), बयारती बासवराज (के.आर. पुरम), और मुनिरत्ना (आर.आर. नगर) शामिल हैं.

विश्वनाथ ने लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए जेडीएस की राज्य इकाई के अध्यक्ष पद से पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था. लोकसभा चुनाव में पार्टी मात्र हासन सीट बचा पाई थी.

बीजेपी प्रवक्ता जी. मधुसूदन ने कहा, “यदि विधानसभा अध्यक्ष सभी 14 इस्तीफों को स्वीकार कर लेते हैं तो सत्ताधारी गठबंधन 104 सदस्यों के साथ अल्पमत में आ जाएगा और विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान हार जाएगा.”

राज्य विधानसभा का 10 दिवसीय मॉनसून सत्र 12 जुलाई से होना है, जिस दौरान मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राज्य के बजट को मंजूरी दी जानी है और लंबित विधेयकों व विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होनी है, जिसमें किसानों की कर्जमाफी, सूखा राहत कार्य और जल संकट शामिल हैं.

विश्वनाथ ने कहा कि गठबंधन सरकार जन आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रही है. उन्होंने कहा, “शासन में सहयोगियों के बीच समन्वय का अभाव स्पष्ट है, जो सत्ता साझेदारी और दैनिक प्रशासन में दिख रहा है.”

विश्वनाथ ने इसमें बीजेपी की किसी तरह की भूमिका से इंकार किया, और कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने खुद से इस्तीफे दिए हैं.

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उन्होंने कहा, “बीजेपी से हमारा कुछ लेना-देना नहीं है. विधायकों का खरीद-फरोख्त नहीं हुआ है. हम सभी राजनीति में वरिष्ठ हैं. हमें खरीदा नहीं जा सकता.”

इस बीच, कर्नाटक में पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता पर नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माथापच्ची कर रहे हैं. आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जीतेंद्र सिंह, पार्टी के कम्युनिकेशंस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और दीपेंद्र हुड्डा शाम को राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी मुख्यालय पहुंचे.

कार्यालय के अंदर जाने से पहले सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, “बैठक के बाद हम कर्नाटक संकट पर बात करेंगे.”

कर्नाटक का क्या है समीकरण

कर्नाटक की 225 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन सरकार के पक्ष में 118 विधायक थे. यह संख्या बहुमत के लिए जरूरी 113 से पांच अधिक थी. इसमें कांग्रेस के 79 विधायक (विधानसभा अध्यक्ष सहित), जेडीएस के 37 और और तीन अन्य विधायक शामिल रहे हैं. तीन अन्य विधायकों में एक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से, एक कर्नाटक प्रग्न्यवंथा जनता पार्टी (केपीजेपी) से और एक निर्दलीय विधायक है.

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास 105 विधायक हैं.

जेडीएस के 37 विधायकों मे से 3 विधायकों ने इस्तीफा दिया है. यानी अब उनके पास सदस्यों की संख्या 34 है. वहीं कांग्रेस के कुल 79 विधायक हैं, जिनमें से 8 ने इस्तीफा दिया है और आमंद कुमार पहले ही इस्तीफ़ा दे चुके हैं. यानी उनके पास अब 70 विधायक हैं, जिसमें स्पीकर भी शामिल हैं. बसपा और निर्दलीय के एक-एक विधायक हैं. कांग्रेस और जेडीएस के मिलाकर अब 107 विधायक हैं, जिनमें बसपा और निर्दलीय विधायक भी शामिल है.

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फिलहाल बसपा और निर्दलीय विधायक का कहना है कि वे गठबंधन सरकार के साथ हैं. 224 विधायकों (स्पीकर के बिना) वाली कर्नाटक विधानसभा में 11 विधायकों के इस्तीफे के बाद सदस्यों की संख्या 213 हो गई है.