इस तरह देंगे तभी इस्तीफा मानेंगे कर्नाटक के विधानसभा स्पीकर

कर्नाटक में सरकार पर संकट है. स्पीकर विधायकों के इस्तीफे नहीं मान रहे लेकिन विधायक हैं कि टस से मस होने को राजी नहीं. जानिए कि विधायकों के इस्तीफे कैसे मंज़ूर होते हैं.

कर्नाटक में विधायकों के इस्तीफे पर बवाल मचा है. बीजेपी कुरसी पर नज़र गड़ाए है लेकिन जेडीएस और कांग्रेस प्रयास में है कि संकट किसी तरह टल जाए. फिलहाल सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए इतनी राहत है कि कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने विधायकों के इस्तीफे तुरंत नहीं स्वीकार रहे हैं. उन्होंने इंतज़ार करने का फैसला लिया है.

दरअसल स्पीकर कह रहे हैं कि वो रूल बुक पढ़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और साथ ही उन सभी विधायकों को एक के बाद एक बुलाकर मिलेंगे जो इस्तीफा देने के इच्छुक हैं.अब जहां बीजेपी चाहती होगी कि विधायकों के इस्तीफे जल्द हो जाएं ताकि सरकार अल्पमत में आ जाए, वहीं इसी वक्त का फायदा उठाकर कांग्रेस अपने रूठे विधायकों को मनाना चाहेगी. कुल मिलाकर कर्नाटक की रस्साकशी का अंतिम निर्णय अब इसी पर निर्भर करेगा कि अंसतुष्ट विधायक कब विधानसभा स्पीकर के सामने पहुंचकर त्यागपत्र देते हैं.

यहां आपको बता दें कि जब गठबंधन के 13 विधायक अपने इस्तीफे सौंपने के लिए स्पीकर के दफ्तर पहुंचे तो वो खुद नदारद थे. नियम के मुताबिक विधायकों का इस्तीफा सिर्फ विधानसभा स्पीकर ही स्वीकार सकते हैं और वो भी केवल तब जब इस्तीफा देनेवाला सशरीर मौजूद हो. फोन पर, फैक्स से, संदेश भेजकर दिए जानेवाले त्यागपत्रों को मंज़ूर नहीं किया जाता है.

कर्नाटक के त्यागपत्र देने को तैयार 13 विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपने इस्तीफे देने की जानकारी दे दी थी लेकिन स्पीकर के सामने इस्तीफा ना होने से मामला फंस गया. कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में अगर वाकई 13 विधायक इस्तीफा दे देंगे को संख्या 211 रह जाएगी. ऐसे में गठबंधन करके सरकार चला रही कांग्रेस-जेडीएस का आंकड़ा 104 विधायकों पर आ टिकेगा तो बीजेपी 107 सीटों के साथ बढ़त पा लेगी. साफ है अल्पमत में आनेवाली सरकार तब खुद बचा नहीं सकेगी.