कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन की तैयारी? इस वजह से जल्‍दबाजी नहीं दिखा रही बीजेपी

सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस और जेडीएस के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे पर अब तक फैसला नहीं किया है, इस वजह से पेंच फंस गया है.

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  • Publish Date - 7:28 pm, Thu, 25 July 19
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बेंगलुरू: कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्‍पा जल्‍द ही नई सरकार बनाने का दावा पेश कर देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कर्नाटक में नई सरकार की राह में अभी कई रोड़े हैं. यही कारण है कि बीजेपी किसी तरह की जल्‍दबाजी करने के मूड में नहीं है. सूत्रों की मानें तो कर्नाटक के गवर्नर वजुभाईवाला राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस और जेडीएस के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला होने तक राष्ट्रपति शासन लग सकता है, क्योंकि बीजेपी भी अनिश्चितता के बीच सरकार बनाने के लिए दावा करने की जल्दी में नहीं है.

बीजेपी के राज्य प्रवक्ता जी मधुसूदन ने कहा, ‘अगर विधानसभा अध्यक्ष बागी विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने या खारिज करने में ज्यादा समय लेते हैं तो राज्यपाल (वजुभाई वाला) राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं, क्योंकि इस तरह की स्थिति में हम सरकार बनाने के लिए दावा करना पसंद नहीं करेंगे.”

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई के आदेश में कहा कि विधानसभा अध्यक्ष दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार बागियों के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बागियों ने विधानसभा में मतदान में भाग नहीं लिया. तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह भी कहा कि बागियों को सदन में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब उनके इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष 11 जुलाई से लंबित हैं. न्यायालय के 10 जुलाई के निर्देश पर उन्होंने (बागियों) ने फिर से विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपा था.

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफों पर फैसला लेने में ज्यादा समय लेने पर बागी विधायकों के शीर्ष अदालत से इसमें दखल के लिए संपर्क किए जाने की संभावना है. बागी विधायकों की अदालत के समक्ष 10 जुलाई की याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को तत्काल इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

उन्होंने कहा, “इस्तीफों के स्वीकार किए जाने तक विधानसभा का संख्या बल 225 बना रहेगा, इसमें एक नामित सदस्य भी शामिल है, जैसा की बागी भी अभी सदस्य हैं, इस तरह से साधारण बहुमत के लिए 113 संख्या जरूरी है. दो निर्दलियों के समर्थन से हमारी संख्या 107 है, जो बहुमत से 6 कम हैं.”

अगर विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं या सदस्यों को अयोग्य करार देते हैं तो विधानसभा का संख्या बल घटकर 210 हो जाएगा और आधी संख्या 106 हो जाएगा, जिससे भाजपा दो निर्दलीयों के सहयोग से जीतने में सक्षम होगी.

मधुसूदन ने कहा, “अगर विधानसभा अध्यक्ष व शीर्ष अदालत को फैसले में समय लगता है तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं और विधानसभा को निलंबित रख सकते हैं, तब हम दावा करने की स्थिति में हो सकते हैं और अपने बहुमत पर सरकार बना सकते हैं.”

अगर बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है या वे अयोग्य करार दिए जाते हैं तो 15 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाएंगे.